रंगदारी न देने पर भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रवि सतीजा के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में शहर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे व साथी लवी मिश्रा को बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया गया। इस बीच अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर रंगदारी लेने की एक और रिपोर्ट बृहस्पतिवार को किदवईनगर थाने में दर्ज हुई है। रिपोर्ट स्वरूपनगर निवासी कारोबारी सुरेश पाल ने दर्ज कराई है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता ने वर्ष 2022 में साजिशन उनके खिलाफ पाॅक्सो और सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में नौबस्ता थाने रिपोर्ट दर्ज कराई थी और उसमें 2.5 करोड़ की रंगदारी ली थी। मामले में उनके साथ कॉस्मोजिन पब लाउंज के संचालक लवी मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस आरोपों की जांच कर रही है।
बताते चलें कि बुधवार को पुलिस ने भाजपा नेता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर अधिवक्ता अखिलेश दुबे व लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था। भाजपा नेता का आरोप था कि अधिवक्ता ने दुष्कर्म के प्रयास का मामला खत्म कराने के लिए उनसे 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। बृहस्पतिवार को कारोबारी सुरेश ने दर्ज रिपोर्ट में बताया कि वह बार और रेस्टोरेंट कारोबार में शामिल थे। वर्ष 2021 में अधिवक्ता ने उन्हें व्हाटसएप कॉल कर कार्यालय बुलाया। कहा कि कुछ लोग तुम्हें फंसाना चाहते हैं, बचना चाहते हो तो रुपये देने होंगे। ऐसा न करने पर झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। कुछ दिनों बाद किदवईनगर निवासी युवती ने 26 मई 2022 को उनके खिलाफ नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसमें घर में घुसकर हमला, पॉक्सो, सामूहिक दुष्कर्म और धमकाने जैसे आरोप शामिल थे। डर के मारे उन्होंने घर और शहर छोड़ दिया। वह शहर के बाहर छिपकर रहने लगे। एक दिन उनके पास अखिलेश दुबे की व्हाटसएप कॉल आई और उन्हें साकेतनगर स्थित कार्यालय बुलाया गया। उन्हाेंने शहर आने पर गिरफ्तारी की आशंका जताई तो उन्हें गिरफ्तारी न होने का भरोसा दिया गया। वह आए तो उनसे पांच करोड़ रुपये की मांग की गई। कहा गया कि पुलिस के कई बड़े अधिकारियों को भी हिस्सा देना है। उन्होंने इतने रुपये देने में असमर्थता जताई। इसके बाद उनसे ढाई करोड़ रुपये की मांग की गई। उन्होंने कई बार में अखिलेश और लवी को रुपये दिए।
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डर के मारे नहीं दर्ज कराई रिपोर्ट
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने अखिलेश के कार्यालय में पुलिस के अधिकारियों को आते-जाते देखा था। इसलिए वह डर कर इतने दिन चुप रहे। हालांकि अब एसआईटी गठित है। ऐसे में उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपों की जांच की जा रही है। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं।
सामने आए 10 मामलों में अखिलेश दुबे का हो सकता हाथ
एसआईटी के सामने आईं 10 शिकायतों की प्रारंभिक जांच में अखिलेश दुबे और उनके कुछ साथियों का नाम आया है। हालांकि पुलिस ने अब तक उसे सार्वजनिक नहीं किया है। वादियों को दस्तावेजों के साथ एसआईटी कार्यालय बुलाया गया है। रवि सतीजा ने बुधवार की दोपहर बर्रा थाने में अखिलेश दुबे, विमल यादव, अभिषेक बाजपेई, शैलेंद्र यादव, लवी मिश्रा और दो युवतियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें जबरन वसूली, साजिश रचने, धमकी देने समेत अन्य धाराएं लगीं। पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई एसआईटी की जांच के बाद हुई।
पुलिस अधिकारियों के पास संगठित गैंग के साजिशन वसूली करने के लिए झूठे दुष्कर्म, छेड़छाड़ समेत अन्य महिला संबंधित अपराधों में एफआईआर कराकर रुपये ऐंठने की शिकायतें आ रही थीं। मिश्रिख सांसद अशोक कुमार रावत के पत्र और अधिवक्ता विकास अवस्थी के शिकायती पत्र के आधार पर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया, जिसमें डीसीपी क्राइम, एडीसीपी क्राइम समेत एक अन्य अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी का गठन तीन मार्च 2025 को हुआ, जिसके बाद 54 लोगों की शिकायतें आ गईं। इन लोगों ने संगठित गिरोह के द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही गई। एसआईटी की टीम ने जांच, जिसमें केवल 10 मामले ही एसआईटी की परिधि में मिले।
एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि अन्य मामले कोर्ट में चल रहे हैं या फिर उनकी डीसीपी स्तर पर जांच जारी है। केवल 10 मामलों में साजिश रचकर लोगों को फंसाने के तथ्य मिले हैं। इसमें अखिलेश दुबे और उनके साथियों का नाम हो सकता है।