बटुकेश्वर ने छोड़ा था गहरा असर
सेंट्रल असेंबली में भगत सिंह के साथ बम फोड़ने वालों में कानपुर के बटुकेश्वर दत्त भी थे। देश की आजादी के लिए उनके मन में ऐसी दीवानगी थी कि वह अंग्रेजों से ना कभी डरे ना डिगे। भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त ने इस घटना को अंजाम किसी को आहत पहुंचाने के लिए नहीं दिया था बल्कि सोई जनता को जगाना उन लोगों का मकसद था, जिसमें वह कामयाब भी हुए
शहर का झंडा ऊंचा किया
पद्मश्री श्यामलाल गुप्त पार्षद ने विजई विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा लिखकर शहर को पहचान दी।
भाईचारे की रक्षा में कर दिया बलिदान
गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म तो प्रयागराज के अतरसुइया में हुआ था लेकिन उनके व्यक्तित्व का जन्म यहीं हुआ था। वह खुद को कनपुरिया ही मानते थे। बात चाहे उनके अखबार 'प्रताप' में अंग्रेजो के खिलाफ छुपे अंगार लेखों की हो या क्रांतिकारियों की मदद की गणेश शंकर विद्यार्थी को इस शहर ने ही यह तीसरी सौगात के रूप में दी थी( मार्च 1931 में हुए। हिंदू-मुस्लिम दंगों में दोनों धर्मों के लोगों को समझाने वह अकेले ही निकल पड़े। पैदल घूम कर लोगों को समझाते रहे लेकिन कुछ नासमझ लोगों ने अंग्रेजों की शह पर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 25 मार्च 1931 को उनका शव मिला इस प्रकार उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया इस शहर को हमेशा गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम से जाना जाएगा