ठगी का शिकार हुई छात्रा से पूछताछ करती पुलिस
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इस पर प्रवेश प्रभारी डॉ. नीलिमा वर्मा ने प्राचार्य को सूचना दी। फर्जी एडमिशन के नए मामले आने पर हड़कंप मच गया और पुलिस को सूचना दी गई। तभी काउंसलिंग प्रभारी डॉ. सुमनलता वर्मा और यूजी प्रभारी डॉ. जलज सक्सेना प्राचार्य के दफ्तर पहुंच गए। कागजात की जांच होने लगी। पाया गया कि कागजात प्राचार्य और एडमिशन कमेटी प्रभारी के फर्जी दस्तखत से जारी किए गए हैं, जबकि एडमिशन लेटर डीजीएमई कार्यालय जारी करता है। फीस ऑन लाइन या कैश जमा कराई जाती है।
ठगों ने 38500 का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया और पेटीएम से पैसे जमा कराए। कागजात में मेडिकल कॉलेज का ईमेल, पिन कोड गलत लिखा है। ठगों ने स्नेहा सिंह से 32 लाख रुपये लिए और शिवानी से 50 हजार रुपये लिए। ठगों ने स्नेहा सिंह से 30 लाख रुपये वार्ड 50 के पास लिए थे।
डील गाजियाबाद के वैशाली में क्लाउड 9 टावर, 18 फ्लोर, सेक्टर एक के कमरा नंबर 1804 में की गई। इस कमरे पर साईं एजुकेशन का बोर्ड लगा था। मधु चौहान ने बताया कि नीट में स्नेहा की 386वीं रैंक रही है। उसे प्राइवेट कॉलेज में दाखिल मिल रहा था। लेकिन ठगों ने लगातार फोन किया और कागजात दिखाए, जिससे विश्वास हो गया।
डील आकाश सिंह नामक व्यक्ति ने की। 15 मार्च को जब पैसे देने थे तो आकाश सिंह खुद आया था और सर्वोदयनगर के एक होटल में ठहरा था। अब उसके सारे फोन बंद हैं। स्नेहा के पिता से कहा था कि पुलिस को सूचना देने पर मामला फंस जाएगा। वहीं, शिवानी के पिता नरेंद्र दास ने बताया कि उसने 50 हजार दिए थे, बाकी पैसे एडमिशन लेने के बाद देना को कहा था। पुलिस ने बयान दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।