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एडमिशन में ठगी: एमबीबीएस में एडमिशन के नाम पर 32.5 लाख ठगे, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का मामला

Mon, 11 Apr 2022 06:19 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी के मामले रुक नहीं रहे हैं। ताजे मामले में दो लड़कियों को शिकार बनाया गया है, जिसमें एक डॉक्टर की बेटी और दूसरी कंपाउंडर की बेटी है। दोनों से 35 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई है।
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ठगी का शिकार हुई छात्रा से पूछताछ करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर ठगों ने दिल्ली के एक डॉक्टर और नगीना बिजनौर के प्राइवेट कंपाउंडर से कुल 35 लाख 50 हजार की ठगी कर ली। दोनों की बेटियों के दाखिले का मामला रहा है। सोमवार को फर्जी एडमिशन लेटर और दूसरे कागजात लेकर छात्राएं मेडिकल कॉलेज एडमिशन लेने पहुंची, तो मामला पकड़ में आया। कॉलेज प्रशासन ने दोनों छात्राओं को रोक लिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस छानबीन में जुट गई है।

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प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इस मामले में उनकी फर्जी हस्ताक्षर से पत्र दिया गया है। वह एफआईआर कराएंगे। कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश के नाम पर यह ठगी का तीसरा मामला है। इससे पहले उत्तराखंड की अपूर्वा सैनी से प्रवेश के नाम पर 20 लाख की  ठगी की गई थी। दिल्ली के द्वारिका सेक्टर-9 निवासी डॉ. जसवीर सिंह चौहान की बेटी विनम्रता स्नेहा सिंह अपनी मां शिक्षिका मधु चौहान के साथ कॉलेज में एडमिशन लेने पहुंचीं। वहीं, छात्रा शिवानी दास अपने पिता प्राइवेट कंपाउंडर नरेंद्र दास के साथ कॉलेज आईं। वे जब स्टूडेंट्स सेक्शन गईं और कागजात दिखाए तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

ठगी का शिकार हुई छात्रा से पूछताछ करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
इस पर प्रवेश प्रभारी डॉ. नीलिमा वर्मा ने प्राचार्य को सूचना दी। फर्जी एडमिशन के नए मामले आने पर हड़कंप मच गया और पुलिस को सूचना दी गई। तभी काउंसलिंग प्रभारी डॉ. सुमनलता वर्मा और यूजी प्रभारी डॉ. जलज सक्सेना प्राचार्य के दफ्तर पहुंच गए। कागजात की जांच होने लगी। पाया गया कि कागजात प्राचार्य और एडमिशन कमेटी प्रभारी के फर्जी दस्तखत से जारी किए गए हैं, जबकि एडमिशन लेटर डीजीएमई कार्यालय जारी करता है। फीस ऑन लाइन या कैश जमा कराई जाती है। 

ठगों ने 38500 का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया और पेटीएम से पैसे जमा कराए। कागजात में मेडिकल कॉलेज का ईमेल, पिन कोड गलत लिखा है। ठगों ने स्नेहा सिंह से 32 लाख रुपये लिए और शिवानी से 50 हजार रुपये लिए। ठगों ने स्नेहा सिंह से 30 लाख रुपये वार्ड 50 के पास लिए थे। 
 
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डील गाजियाबाद के वैशाली में क्लाउड 9 टावर, 18 फ्लोर, सेक्टर एक के कमरा नंबर 1804 में की गई। इस कमरे पर साईं एजुकेशन का बोर्ड लगा था। मधु चौहान ने बताया कि नीट में स्नेहा की 386वीं  रैंक रही है। उसे प्राइवेट कॉलेज में दाखिल मिल रहा था। लेकिन ठगों ने लगातार फोन किया और कागजात दिखाए, जिससे विश्वास हो गया।

डील आकाश सिंह नामक व्यक्ति ने की। 15 मार्च को जब पैसे देने थे तो आकाश सिंह खुद आया था और सर्वोदयनगर के एक होटल में ठहरा था। अब उसके सारे फोन बंद हैं। स्नेहा के पिता से कहा था कि पुलिस को सूचना देने पर मामला फंस जाएगा। वहीं, शिवानी के पिता नरेंद्र दास ने बताया कि उसने 50 हजार दिए थे, बाकी पैसे एडमिशन लेने के बाद देना को कहा था। पुलिस ने बयान दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। 
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