कभी सम्राट हर्षवर्द्धन के विशाल साम्राज्य की राजधानी रहे कन्नौज को समृद्ध शहर में गिना जाता था। पुरातन कथाओं में कान्यकुब्ज के नाम से मशहूर रहा यह शहर चीनी यात्री ह्वेन स्वांग की शरण स्थली भी रही है। उनकी किताब में कन्नौज की समृद्ध विरासत का जिक्र यह जाहिर करता है कि सदियों पहले भी यहां पयर्टक आते रहे हैं और यहां की संपन्नता और वैभव पर फिदा होते रहे हैं।
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अब मौजूदा वक्त में चलिए। सियासत के गलियारे में भी कन्नौज का वैभव अलग ही है। सपा ने इसे अपना दुर्ग बनाया तो भाजपा इसमें सेंधमारी की लगातार जुगत करती रही है। चुनाव की रपटीली राहों से दिल्ली का सफर तय करने के लिए सियासतदानों को कन्नौज की पतली गलियों से होकर गुजरना होता है। यहां की गलियां उनकी ही राह आसान करती हैं, जिन्हें यहां चलने की आदत हो। गलियों की तरफ न देखने वालों को यहां से पार पाना मुश्किल भरा होता है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यहां हमेशा दबदबा बनाए रखने पर इसे सपा के सबसे सुरक्षित किले के रूप में पहचान मिली। यह अलग बात है कि दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दो दशक की कोशिश के बाद सपा के इस किले में सेंधमारी कर ली थी। हालांकि लोकसभा चुनाव में भाजपा अपनी कोशिश में कितनी कामयाबी होगी, यह देखने वाली बात होगी।
चार चुनाव के बाद भाजपा को मिली थी कामयाबी
कन्नौज संसदीय सीट की पांच विधानसभा क्षेत्र में शामिल कन्नौज सदर विधानसभा सीट की पहचान सपा के सबसे सुरक्षित किले के रूप में होती है। पिछले दो लोकसभा चुनाव के दौरान यहां सपा को भाजपा पर बढ़त मिलती रही है। 2022 से पहले के चार विधानसभा चुनाव में भी सपा ने यहां जीत का चौका लगाया था। वर्ष 2022 में भाजपा ने नया दांव चला और सपा इस सीट को गंवा बैठी। कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर को भगवा चोला पहनाकर सियासत के दंगल में उतारने का फार्मूला काम कर गया और भाजपा ने सपा के सबसे सुरक्षित किले में शुमार कन्नौज विधानसभा सीट पर फतह हासिल कर ली। ऐसे में लोकसभा में इस सीट पर हमेशा ही पिछड़ने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव जीत कर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाए हुए है।
लोकसभा चुनाव में सपा हासिल करती है बढ़त
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा से इस सीट को झटकने वाली भाजपा उसके पहले के दो विधानसभा चुनाव में सपा से हारी थी। 2012 में तीसरे नंबर पर रही थी। जबकि लोकसभा चुनाव के भाजपा इस सीट पर बढ़त बनाने में चूकती रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सपा की बढ़त का अंतर जरूर कम किया था, लेकिन सपा को बढ़त बनाने से रोक नहीं सकी थी।
दलित बाहूल्य सदर सीट पर मुस्लिम और ब्राह्मण वोट अहम
जिले की तीन विधानसभा सीट में कन्नौज सदर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां सबसे ज्यादा करीब 30 फीसदी वोटर इसी वर्ग से हैं। उसमें भी जाटव बिरादरी की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके बाद मुस्लिम वोटर करीब 22 फीसदी हैं। इसी तरह ब्राह्मण वोटर की संख्या भी 20 करीब 20 फीसद है। यादव की संख्या 25 फीसदी है। क्षत्रिय, कुर्मी भी निर्णायक सि्थति में हैं। दलित बिरादरी को अपने पाले में करने की कोशिश सभी उम्मीदवारों की है। बसपा अपने इस काडर वोट को सहेजने में जुटी है। भाजपा और सपा अपने-अपने परंपरागत वोट के अलावा दूसरी बिरादरी पर भी निगाह लगाए हैं।
तंग गलियों को जाम से निजात का इंतजार, सड़क किनारे कूड़े का ढेर
शहर का स्वरूप पुराना है। यहां अब भी पतली गलियां हैं। शहर के अंदरूनी हिस्से की सड़क भी संकरी है। तंग गलियों से होकर गुजरना लोगों के लिए काफी मुश्किल भरा होता है। जो सड़कें बनीं, उन्हें बाद में वाटरलाइन डालने के लिए जल निगम ने खोद दिया। शहर के ज्यादातर इलाके की सड़कें जलनिगम की इसी कारिस्ती की वजह कर जगह-जगह खुदी पड़ी हैं। बाद में पैचिंग की गई, लेकिन ऊबड-खाबड़ को दूर नहीं किया जा सका। इसी तरह खुशबू के लिए पहचान रखने वाले शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि शहर से रोजाना निकलने वाला करीब 40 टन कूड़ा निस्तारण के बजाए मुख्य सड़क के दाएं-बाएं फेक दिया जाता है। शहर से बाहर कानपुर या फर्रुखाबाद की तरफ जाने पर सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर और उसके निस्तारण के बजाए उसमें आग लगाने से उठने वाला धुआं हर किसी का ध्यान खींच रहा है। जिम्मेदार इसकी अनदेखी कर रहे हैं।
पयर्टन की संभावना, उदघाटन की राह तक रहा म्यूजियम
अपने दामन में सदियों पुराना सुनहारा इतिहास समेटे कन्नौज शहर में जीटी रोड किनारे राजकीय म्यूजियम बनकर तैयार खड़ा है। इसे बने हुए सात साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया। अब तक इसे औपचारिक रूप से शुरू नहीं किया गया है। सपा सरकार के दौरान इसकी शुरुआत की गई थी। इसके अलावा भी यहां पयर्टन की काफी संभावना है, लेकिन आश्वासन से आगे कभी काम हुआ नहीं है। बच्चों के लिए भी अलग से म्यूजियम बनना था। सात से इमारत खंडहर की तरह खड़ी है। सपा सरकार में शुरू हुए लोहिया पार्क में जरूरी सुविधा और संसाधन नहीं हैं। लोग जाने में हिचकते हैं। एक अदद पयर्टन अधिकारी का यहां से तबादला हुए भी छह माह से ज्यादा हो चुका है, अब तक किसी नए अधिकारी की तैनाती नहीं हुई है। यहां के विधायक और समाज कल्याण मंत्री की कोशिश से सांस्कृतिक आयोजन की पहल हुई थी, बाद में वह भी ठप पड़ गई।
पिछले दो लोकसभा चुनाव का नतीजा
2014 में इस तरह हुआ था मुकाबला: सपा को 111272, भाजपा को 103171, बसपा को 29867
2019 में भी इस तरह मिले वोट: सपा को 126290, भाजपा को 117449 वोट
पिछले तीन विधानसभा चुनाव का नतीजा 2022 का नतीजा: सपा को 114786 वोट, भाजपा को 120876 वोट, बसपा को 26239 वोट
2017 का नतीजा: सपा को 99635 वोट, भाजपा को 97181, बसपा को 44182 वोट 2012 का नतीजा: सपा को 95702, भाजपा को 42220, बसपा को 50020 वोट मिले
कन्नौज सदर के वोटर कुल वोट: 430213 पुरुष: 204559 महिला: 201532 थर्ड जेंडर: 14
विधानसभा चुनाव में सपा से इस गढ़ को हासिल करने वाले असीम अरूण को सरकार में समाज कल्याण मंत्री का पद मिला हुआ है। वह दलित अस्मिता के मुद्दे को पूरी दमदारी से उठाते रहे हैं। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार की योजनाओं के साथ जनता के बीच पहुंच रहे हैं।
कन्नौज सदर सीट पर सपा के विधायक रहे कल्याण सिंह दोहरे को इस चुनाव में आगे कर सपा ने दलित वोटर में पैठ बनाने की कोशिश की है। वह अखिलेश यादव के नामांकन में प्रस्तावक भी रहे हैं। सपा शासन के दौरान क्षेत्र में हुए विकास का हवाला देकर भाजपा को घेर रहे हैं।