कानपुर देहात। बेहमई कांड में सोमवार को अभियोजन ने बहस शुरू की। इसमें घटना को फिर से अदालत के सामने रखा गया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को नक्शा नजरी के माध्यम से घटना की वीभत्सा बताई। साथ ही अभियुक्तों की शिनाख्त परेड की कार्रवाई के बाबत भी बताया। इसमें फैसला आने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में डकैत फूलन देवी ने गिरोह के साथ धावा बोलकर 20 लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। इसमें सात लोग घायल हुए थे। इस घटना की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में हो रही है। घटना में वादी राजाराम समेत कई आरोपियों की मौत हो चुकी है। मामले में 41 साल बाद अब फैसला आने की उम्मीद दिखी है। घटना को लेकर अंतिम बहस शुरू हो गई है।
सोमवार को बहस के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने न्यायालय के समक्ष नक्शा नजरी के माध्यम से घटना का चित्रण प्रस्तुत किया। अभियुक्त विश्वनाथ, श्यामबाबू व पोसा की शिनाख्त मेमो कार्रवाई के बाबत कोर्ट को फिर से अवगत कराया। बताया कि जेल में इन अभियुक्तों की गवाहों ने शिनाख्त की थी। इसमें पोसा जेल में है, जबकि दो आरोपी जमानत पर बाहर हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान विश्वनाथ मौजूद रहा जबकि श्यामबाबू की हाजिरी माफी लगाई गई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अब कोर्ट ने बहस के लिए अगली तिथि दो मार्च तय की है। इस तिथि पर तीनों अभियुक्तों को तलब किया गया है।
41 साल से फरार हैं ये आरोपी
बेहमई कांड जैसे बड़ी घटना में आरोपी महेशपुर देवराहट के विश्वनाथ उर्फ पुतानी उर्फ अशोक, जालौन जिले के रामरतन व मान सिंह अभी तक फरार हैं। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रदेश के कई जिलों की पुलिस लगाई गई थी। इसके बावजूद पुलिस इन अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।