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पांच दिन में फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी: कानपुर के पारुल सिंह बोले- लक्ष्य पाना है तो भूख-नींद भूलनी पड़ेगी

Wed, 18 Aug 2021 07:43 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़कर रिकॉर्ड कायम करने का सपना संजोए पारुल बताते हैं कि रूस में स्थित चोटी के जैसे-जैसे पास पहुंच रहे थे, तापमान कम हो रहा था। एक समय तो माइनस 40 डिग्री तापमान था।
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पारूल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एक पहाड़ की चढ़ाई पूरी करने के बाद दो दिनों तक भूख नहीं लगती और नींद नहीं आती है। सिर दर्द भी होता रहता है, लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ेगा ही न। यह कहना है कि श्याम नगर निवासी पारुल सिंह का। पारुल ने पांच दिन में यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस की चढ़ाई पूरी की है।
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चोटी की ऊंचाई 5642 मीटर है। पारुल ने आठ अगस्त को चढ़ाई शुरू की थी। 13 अगस्त को इन्होंने चोटी फतह कर ली थी। सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़कर रिकॉर्ड कायम करने का सपना संजोए पारुल बताते हैं कि रूस में स्थित चोटी के जैसे-जैसे पास पहुंच रहे थे, तापमान कम हो रहा था।

एक समय तो माइनस 40 डिग्री तापमान था। होठ कांप रहे थे, हाथ-पैर सुन्न हो रहे थे। लेकिन लक्ष्य सामने दिख रहा था तो कदम अपने आप बढ़ रहे थे। पारुल के पिता आनंद सिंह सिविल कॉन्ट्रैक्टर और मां अंजू सिंह गृहिणी हैं।
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संघ प्रांत प्रचारक व महापौर ने किया सम्मानित 
मंगलवार को केशव भवन में आरएसएस के प्रांत प्रचारक श्रीराम ने और नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय ने पारुल को सम्मानित किया। पारुल ने बताया कि चोटी चढ़ाई में आने वाले खर्च में नगर निगम, कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और जियो ने मदद की है। महापौर ने बताया कि पारुल शहर का गौरव हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की मदद के लिए खिलाड़ी उनसे संपर्क कर सकते हैं। 

अब अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट 
पारुल इससे पहले 2017 में लद्दाख की सबसे ऊंची चोटी स्टॉक कांगड़ी (6135 मीटर) और 2018 में अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो (5885 मीटर) चोटी को फतह कर चुके हैं। अब इनका अगला टारगेट माउंट एवरेस्ट है। पारुल कहते हैं कि सपना पूरा करने के बाद गरीब खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खोलना है। 

जिम में बहाते हैं तीन घंटे पसीना
साकेत नगर स्थित जिम में कोच हेमंत पांडेय पारुल को रोजाना तीन घंटे की ट्रेनिंग देते हैं। अमेरिकन मशीन एस ड्राइव और एस फोर मैट्रेस पर 40 किलो वजन अपने कंधों पर लादकर पारुल 30 मिनट से ज्यादा समय तक तेज गति में चलने का अभ्यास करते हैं। कोच ने बताया कि इस अभ्यास के बाद ही पहाड़ों पर आसानी से चढ़ा जा सकता है।
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