पीएम किसान सम्मान निधि की नौंवी किस्त जारी करने से पहले हुई जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। जांच में सामने आया है कि 202 लोग दो-दो खातों से योजना का लाभ ले रहे थे। 259 ऐसे थे जिनकी मृत्यु होने के बाद भी सम्मान निधि उनके खाते में जा रही थी।
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कुल 10172 अपात्र मिले हैं, जिन्हें योजना से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इनसे अब रिकवरी की तैयारी विभाग कर रहा है। सरकारी लाभ लेने के लिए किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसकी बानगी किसान सम्मान निधि योजना की जांच में देखने को मिली है।
जब आठवीं किस्त जारी हुई तो जिले में 335770 किसानों के खाता में दो-दो हजार रुपये भेजे गए थे, लेकिन इसमें भारी संख्या में अपात्र किसान जुड़े थे। इन किसानों का कृषि विभाग की टीम ने सत्यापन कराया, जिसमें 259 किसान ऐसे मिले, जिनकी मृत्यु हो गई और सम्मान निधि इनके खाते में जा रही थी। वहीं, 5366 ऐसे किसान मिले, जिनके खाते ही गलत थे। कृषि विभाग ने जांच में अपात्र मिले किसानों को योजना से बाहर कर दिया है।
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इन बिंदुओं पर हुआ सत्यापन
- नाम, पिता या पति का नाम, गांव, आधार संख्या, पात्र है कि नहीं।
- किसान के पास कितनी जमीन है, खसरा, खतौनी का सत्यापन।
- डॉक्टर, सीए, इंजीनियर, अधिवक्ता, आयकर दाता या किसी संस्थान में पंजीकृत।
- किसान लोक सेवा के किसी पद, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख तो नहीं है।
- लाभार्थी को 10 हजार से अधिक पेंशन तो नहीं मिल रही है।
- पीएम सम्मान निधि में पति-पत्नी शामिल तो नहीं हैं।