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कोरोना काल में धनकुबेर बन गए एसएनके समूह के मालिक: कच्चे माल और पैकेजिंग मैटीरियल ने खोले कर चोरी के सारे राज

Sat, 14 Aug 2021 05:46 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

डायरेक्ट्रेट जनरल आफ जीएसटी इंटीलेसीजेंस (डीजीजीएसटीआई) की खुफिया विंग ने पुख्ता सबूत मिलने के बाद इतनी बड़ी कार्रवाई की है।
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एसएनके पान मसाला कंपनी के मालिक और निदेशक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में जब उद्योग बंद हो गए थे। फैक्ट्रियों में उत्पादन कम हो गया था। तब एसएनके समूह के मालिकान बंपर उत्पादन कर रहे थे। कागजों पर फैक्ट्री कम दिन के लिए चलाई दिखाई जाती थी। लेकिन उत्पादन दिनों-दिन बढ़ता चला गया था।
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डायरेक्ट्रेट जनरल आफ जीएसटी इंटीलेसीजेंस (डीजीजीएसटीआई) की खुफिया विंग ने पुख्ता सबूत मिलने के बाद इतनी बड़ी कार्रवाई की है। 154 करोड़ की टैक्स चोरी का मामला प्रकाश में आया है। दरअसल, टीमों को कच्चे माल, उत्पादन, पैकेजिंग मैटीरियल में बड़े पैमाने पर गोलमाल मिला है।

इन पर बीते कई महीनों से निगाह रखी जा रही थी। सुपाड़ी, सुगंध खरीद आदि कच्चे पर्चे पर ही दिखाई जाती थी। एजे सुगंधी आठ साल से पान मसाला के कारोबार में है। एसएनके ब्रांड नाम से इनके पान मसाला की ब्रिकी शहर के आसपास दो सौ किलोमीटर के दायरे में आने वाले जिलों और गांवों तक में सप्लाई की जाती थी।
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इसके अलावा कई राज्यों में भी इसकी सप्लाई की जानकारी मिली है। गुटका के बाजार में सबसे बड़ा ब्रांड इस समय बन चुका है। गांव और दूरदराज इलाकों में पहले इसे कम कीमत पर बेचा जाता था। धीरे-धीरे मांग बढ़ने पर आज बाजार में इसकी बड़ी हिस्सेदारी हो गई है।

सूत्रों ने बताया कि आयकर की जांच से पहले करीब तीन महीने पहले जीएसटी विंग ने जांच-पड़ताल की थी। इसमें बड़े पैमाने पर कर चोरी के दस्तावेज हाथ लगे थे। इसके बाद से लगातार नजर रखी जा रही थी। बीते 28 जुलाई को आयकर विभाग ने एसएनके समूह के कानपुर, नोएडा, दिल्ली, उरई आदि के 19 ठिकानों पर छापा मारा था।

बाद में कई दिन तक चली जांच पड़ताल में चार सौ करोड़ का अघोषित कारोबार पकड़ा गया था। तीन साल के भीतर 115 बोगस कंपनियों के जरिए अकेले पान मसाला कारोबार में 110 करोड़ खपाए गए थे। इसके जरिए की भी जानकारी जांच के दौरान मालिक नवीन कुरेले और प्रवीन कुरेले आयकर के अफसरों को नहीं दे पाएं थे।
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आयकर-जीएसटी विभाग की जुगलबंदी ने पकड़ी अरबों रुपये की टैक्स चोरी
एक जुलाई 2017 को जीएसटी अस्तित्व में आया था। इस नई व्यवस्था में सेंट्रल, स्टेट जीएसटी की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही आयकर विभाग, कस्टम, इंटेलीजेंस के साथ सूचनाओं के अदान-प्रदान की व्यवस्था शुरू हुई। इससे अब बड़ी-बड़ी कर चोरी के खुलासे हो रहे हैं। जीएसटी से पहले दोनों विभाग अपनी अलग-अलग कार्रवाई करते थे। लेकिन अब नए-नए साफ्टवेयर आने के बाद सूचनाएं तेजी से अदान-प्रदान होती हैं।

गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी
टैक्स चोरी में गिरफ्तार किए गए एसएनके समूह के मालिक नवीन कुरेले और निदेशक अविनाश मोदी की गिरफ्तारी पर दि किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश बाजपेयी ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा सीजीएसटी में गिरफ्तारी का विरोध किया। यदि टैक्स चोरी की गई तो उसे वसूलने के और भी तरीके हैं। कारोबारी सरकार को टैक्स देता है।
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