ओमिक्रॉन नहीं, कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा वैरिएंट ही लाया है। इसका खुलासा जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट से हुआ है। जो संक्रमित मिल रहे हैं उनमें शुरुआती लक्षण डेल्टा के ही हैं। लेकिन इस बार जटिलताएं उतनी नहीं हैं। रोगियों का ऑक्सीजन लेवल उतनी तेजी से कम नहीं हो रहा है।
होम आइसोलेशन में दी जा रही दवाओं से स्थिति कंट्रोल हो रही है। खतरा सिर्फ कोमॉर्बिड रोगियों के लिए है। वायरल संक्रमण से उनकी पुरानी बीमारियों की जटिलता जानलेवा साबित हो सकती है। कोरोना की तीसरी लहर में स्वरूपनगर और रतनलाल नगर की दो महिलाएं ओमिक्रॉन संक्रमित मिली हैं।
ये विदेश से लौटी थीं। सीएमओ की ओर से तीन हजार सैंपलों की कराई गई जीनोम सीक्वेंसिंग जांच में डेल्टा मिला है। यह जांच लखनऊ और दिल्ली के वायरोलॉजी संस्थानों में कराई गई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कोविड लैब से 36 सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए भेजे गए।
इनकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है। लेकिन दूसरी लहर के आखिरी चरण में जो सैंपल भेजे गए थे, उनमें भी डेल्टा ही आया था। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ। दूसरी लहर में संक्रमण का फैलाव अपने न्यूनतम पर आया। संक्रमित बीच-बीच में मिलते रहे थे।
इसी से लगातार कोविड गाइडलाइन के पालन की अपील की गई। अब सवाल यह है कि डेल्टा माइल्ड कैसे हो गया? इस संबंध में डॉ. सिंह का कहना है कि 30 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज लग चुकी है। इसके अलावा कम्युनिटी स्प्रेड हो जाने पर हल्के संक्रमण से लोगों में एंटी बॉडीज हो गई। इससे जटिलताएं जल्दी नहीं उभर रही हैं। इसके अलावा लोग एहतियात भी बरत रहे हैं।