एनडीआरएफ के अधिकारी विनय कुमार ने जेसीपी को बताया कि लगातार इमारतों के अंदर आग जलने और बंद दुकानों के अंदर कपड़े सुलगने के कारण पूरी तरह से धुआं भरा हुआ है। टीम को इमारत के अंदर जाकर शटरों को तोड़कर आग बुझानी होगी, लेकिन अंदर ऑक्सीजन शून्य हो चुकी है। बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के इमारतों के अंदर जाने का रिस्क नहीं उठाया जा सकता। जब कुछ जवानों को ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ अंदर भेजा गया, लेकिन तापमान करीब 400 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। ऐसे में अधिकारियों ने इमारतों पर लगातार पानी की बौछार करके अंदर के तापमान को कम कराने का प्रयास शुरू किया है। एनडीआरएफ के अधिकारियों के अनुसार आग बुझने के बाद भी तापमान सामान्य होने के लिए 24 घंटे तक का इंतजार करना पड़ सकता है। जेसीपी के अनुसार इमारतें आग में जर्जर हो चुकी हैं। इनके स्लैब भी कहीं-कहीं गिर गए हैं।
रिपोर्ट के बाद ही इमारतों के दोबारा इस्तेमाल पर होगा विचार
जेसीपी के अनुसार आग बुझने के बाद इंजीनियरों की मदद से तकनीकी मुआयना कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही इन इमारतों को फिर से इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। फायर अफसर विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि लगातार आग के चलते इमारतों का तापमान 350 से 400 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस कारण अंदर से आग बुझा पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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