उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज कैंपस में स्वाइन फ्लू और डेंगू फैलना गंभीर बात है। इससे आप लोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को तत्काल सफाई के साथ व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच करने आए प्रमुख सचिव और उनकी टीम में शामिल केजीएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. विपिन पुरी और मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने इससे पूर्व हैलट अस्पताल जाकर वहां आइसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती स्वाइन फ्लू पीड़ित मेडिकल छात्रा पाखी की हालत देखी डॉक्टरों व परिजनों से बात किया। प्रमुख सचिव ने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि अच्छे से अच्छा इलाज करने के निर्देश दिए। इमरजेंसी का जायजा लेने के बाद वह मेटरनिटी विंग में स्वाइन फ्लू व डेंगू की वजह से भर्ती चार अन्य एमबीबीएस छात्राओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
सर यहां बहुत गंदगी है, बोलते हैं तो चुप करा दिया जाता है
प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित अंडर ग्रेजुएट गर्ल्स हॉस्टल के अंदर जाकर वहां की व्यवस्था भी देखी। छात्राओं ने प्रमुख सचिव से कहा कि सर यहां पर गंदगी बहुत है, कहने के बावजूद सफाई नहीं की जाती है। उल्टे हम लोगों को फटकार कर चुप करा दिया जाता है। छात्राओं की शिकायत सुनने के बाद प्रमुख सचिव और कुलपति ने परिसर प्रभारी व वार्डेन फटकार लगाई। कहा कि इस तरह की लापरवाही आगे हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पीजी गर्ल्स हॉस्टल में गंदगी देख जताई नाराजगी
यहां के बाद वह से अधिकारियों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट गर्ल्स हॉस्टल पहुंचे। वहां भी गंदगी, जलभराव देख वह फिर से गुस्सा हुए। इससे पहले उन्होंने मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. संजय काला, उप प्राचार्य प्रोफेसर रिचा गिरि, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा, सीएमओ डॉ. आलोक रंजन, कॉलेज के प्राक्टर प्रोफेसर यशवंत राव, प्रमुख अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. आरके मौर्या आदि मौजूद रहे।
प्रमुख सचिव के सामने भिड़े कॉलेज कैंपस प्रभारी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी
प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर प्रभारी डॉ. आनंद नारायण सिंह ने गंदगी, जलभराव और कूड़ा न उठाए जाने का ठीकरा नगर निगम पर फोड़ दिया। कहा दो करोड़ टैक्स देते हैं, लेकिन नगर निगम सफाई नहीं कराता है। यह सुन वहां मौजूद नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर ने एतराज किया। कहा, मेडिकल कॉलेज के पास साफ-सफाई के लिए पूरी टीम है, जिसमें दो सैनेटरी इंस्पेक्टर भी हैं। उसके बाद भी काम नहीं करा पा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई है। आउटसोर्स कंपनी भुगतान पर कूड़ा उठाती है। इस बीच, मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने बीच बचाव करते हुए समन्वय स्थापित करके कार्य करने का निर्देश दिया।
एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश
कानपुर। प्रमुख सचिव की नाराजगी से बचने के लिए वहां के अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारियों का ठीकरा फोड़ते रहे, उधर छात्र लगातार स्वाइन फ्लू और डेंगू की चपेट में आते जा रहे हैं। हुआ यू कि जब प्रमुख सचिव ने यूजी गर्ल्स हॉस्टल के निरीक्षण के दौरान वहां पर गंदगी को लेकर नाराजगी जाहिर किया और प्रभारी को फटकारा तो प्रभारी डॉ. नीना गुप्ता ने गंदगी के लिए कॉलेज परिसर प्रभारी डॉ. आलोक नारायण और सिनेटरी इंस्पेक्टर शक्ति सिंह के सिर पर ठींकरा फोड़ने की कोशिश की। दावा किया कि हॉस्टल में मरम्मत चल रही है। कुछ गंदगी तो रहेगी ही, पर आसपास फैली गंदगी, मच्छरों के प्रकोप के कारण संक्रामक रोग फैल रहे हैं। जबकि डॉ. आलोक ने हॉस्टल की गंदगी के लिए वहां की प्रभारी को जिम्मेदार बताया।
बच्ची को बचाने का हो रहा हरसंभव प्रयास
प्रमुख सचिव ने हैलट आईसीयू में स्वाइन फ्लू संक्रमित एमबीबीएस छात्रा के पिता के कंधे पर हाथ रखकर सांत्वना दी। कहा, सरकार आपके साथ है। बच्ची को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। गर्ल्स हॉस्टल में भी छात्राओं को आश्वासन देते हुए प्रोत्साहित करने की कोशिश की।