बिकरू कांड के आरोपियों पर लगे गैंगस्टर मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता के सवालों में वादी इंस्पेक्टर उलझ गए। वे कई सवालों का जवाब भी नहीं दे सके। आगे की सुनवाई के लिए अदालत ने एक नवंबर की तारीख तय की है। बिकरू कांड में पुलिस ने 30 आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी।
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-पांच गैंगस्टर बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही है। वादी इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय से बचाव पक्ष जिरह कर रहा है। शुक्रवार को आरोपी धर्मेंद्र दुबे उर्फ हीरू, धीरेंद्र उर्फ धीरू, मनीष उर्फ बीरू, गोविंद सैनी, सुरेश वर्मा, रमेशचंद, संजू दुबे, गोपाल सैनी व दयाशंकर अग्निहोत्री की ओर से अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने जिरह की।
अधिवक्ता ने इंस्पेक्टर से पूछा कि मामले में बीट सिपाही ने अभ्यस्त अपराधियों की सूचना क्या अपराध रजिस्टर के फ्लाई सीट में अंकित की थी। इस पर इंस्पेक्टर ने जानकारी होने से इनकार किया। हीरू दुबे का हिस्ट्रीशीट नंबर पूछा तो भी जवाब नहीं दे सके। अधिवक्ता ने पूछा कि यदि कथित गैंग की क्रियाशीलता संपूर्ण जनपद में थी, तो अन्य थानों के बीट सिपाही की रिपोर्ट का गैंग चार्ट बनाने से पहले अध्ययन किया था।
इंस्पेक्टर ने बताया कि रिपोर्ट मंगाई गई थी, लेकिन गैंग चार्ट में उसका हवाला नहीं दिया गया है। बचाव पक्ष ने इसका कारण पूछा, तो इंस्पेक्टर जवाब नहीं दे सके। हालांकि विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने बचाव पक्ष के कई सवालों का विरोध किया।