दिबियापुर (औरैया)। उड़ीसा के क्योंझर में हत्या करने के मामले में औरैया निवासी दारा सिंह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वर्ष 2000 से आजीवन कारावास की सजा काट रहे दारा सिंह को रिहा करने की मांग ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर जोर पकड़ा। योद्धा दारा सिंह को रिहा करो के साथ पूरे दिन सैकड़ों लोगों ने ट्विटर पर मांग की।
वर्ष 1999 में 22 जनवरी को उड़ीसा के क्योंझर में आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस व उनके दो छोटे बेटे कार में सो रहे थे। रात में भीड़ ने कार में आग लगा दी थी। इससे तीनों की जलकर मौत हो गई थी। इस मामले में औरैया के ककोर निवासी रविंद्र कुमार उर्फ दारा सिंह को भीड़ की अगुवाई करने में मुख्य आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2000 में दारा सिंह को सीबीआई अदालत ने वर्ष 2003 में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया था।
वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा था। वर्ष 2000 से लगातार दारा सिंह क्योंझर की जेल में बंद हैं। मंगलवार को ट्विटर पर दारा सिंह को रिहा करने की मांग ने जोर पकड़ा। सैकड़ों लोगों ने दारा सिंह को रिहा करने की मांग की। हालांकि इस मांग के समर्थन में औरैया जिले के इक्कादुक्का लोगों के ही शामिल होने की जानकारी मिली है। मांग करने वालों ने लिखा कि उम्र कैद की सजा 20 वर्षों में पूरी हो जाती है। दारा सिंह को माता-पिता की मौत पर एक दिन के लिए भी पैरोल नहीं मिला। अब उन्हें जेल से रिहा किया जाए।
इंसेट
16 वर्ष बाद पिता की अस्थियां की प्रवाह
दिबियापुर (औरैया)। दारा सिंह के ककोर निवासी भाई अरविंद कुमार पाल ने बताया कि उनके पिता मिहीलाल की मौत वर्ष 2005 व माता राजरानी की मौत वर्ष 2012 में हुई थी। मौत के बाद भाई को पैरोल पर रिहा करने की मांग की थी। मगर उन्हें पैरोल पर भी रिहा नहीं किया गया। भाई के रिहा होने के इंतजार में माता-पिता की अस्थियां विसर्जन के लिए रखीं थीं। बताया कि बेटी शादी लायक है। इसलिए जानकारों से राय ली तो बताया कि जब तक माता-पिता की अस्थियां विसर्जित नहीं हो जाती। तब तक मांगलिक कार्य शुरू नहीं होंगे। इसलिए 15 दिन पहले माता-पिता की अस्थियां विसर्जित की गईं हैं। बताया कि प्रधानमंत्री से लेकर उड़ीसा के राज्यपाल को भाई को रिहा करने की मांग संबंधी पत्र भेजे गए हैं।