साक्ष्यों में अभाव में मामला हुआ था ठंडा
पुलिस ने भी इसे खुदकुशी मानते हुए फोरेंसिक और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर कोई साक्ष्य न होने को आधार बनाते हुए मिल मालिक की गिरफ्तार नहीं की। जेसीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने ठंडे बस्ते में पड़े मामले की फिर से जांच शुरू कराई। वर्तमान थाना प्रभारी कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने जांच की।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी गलत
फिर मिल मालिक के खिलाफ साक्ष्य मिटाने की धारा बढ़ाते हुए 19 फरवरी 2023 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में थी। इसके लिए स्टेट मेडिको लीगल सेल से घटना स्थल की दोबारा जांच कराई गई थी।
थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच
स्टेट मेडिको लीगल सेल थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांचके ज्वाइंट डायरेक्टर डॉक्टर कीर्तिवर्धन सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फील्ड यूनिट की जांच रिपोर्ट को सिरे से नकार दिया। इसके साथ ही, आरोपी से भी पूछताछ की। उन्होंने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सवालों को सुनकर हत्यारोपी का छूटा पसीना
जमानत पर बाहर आए संदीप गुप्ता से जब डायरेक्टर डॉ. कीर्तिवर्धन ने सवाल किया तो उसके पसीना छूटने लगा। संदीप ने बताया कि घटना के दिन वह अपने एक परिचित के साथ सर्वेंट क्वार्टर के बाहर पहुंचे। देखा कमरे का गेट अंदर से बंद था। इस पर उन्होंने धक्का मारकर गेट तोड़ा।
ज्वाइंट डायरेक्टर ने फील्ड यूनिट की रिपोर्ट को नकारा
मौत के बाद फील्ड यूनिट प्रभारी डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण सर्वेंट क्वार्टर के चौतरफा बंद होने के कारण दम घुटना बताया था। विवेचक थाना प्रभारी ने सवाल उठाया कि जिस कमरे में शव मिला था, उसमें एक खिड़की, गेट के नीचे चार इंच का गैप व पीछे की दीवार पर दो होल थे। ऐसे में दम कैसा घुट सकता है।
शरीर पर थे चोटों के निशान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिक्र नहीं
विवेचक ने ज्वाइंट डायरेक्टर को बताया कि घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले पुलिस कर्मियों ने कमरे का सामान अस्त व्यस्त पड़ा होने व मृतक के शरीर पर चोटों के निशान बताए थे। पंचायतनामा करता एसआई जग प्रताप सिंह ने भी अपने बयान में शरीर पर चोटों के निशान की पुष्टि की थी। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का जिक्र नहीं किया गया।