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फतेहपुरः सीबीआई छापा की साइड स्टोरी

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फतेहपुर। पिछले दो सालों में लक्ष्मी ग्रुप की बंद पड़ी मिलों में आग लगने कई घटना हुईं। यहां सिक्योरिटी गार्ड मौजूद रहते थे। इसके बाद भी आग लगने का कारण संदिग्ध रहा। मिल प्रशासन की ओर से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का भी प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस ने मिल बंद होने के कारण रिपोर्ट दर्ज करना उचित नहीं समझा।
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मलवां थाना अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र सौंरा की लक्ष्मी कॉटन मिल में करीब आठ माह पहले और करीब दो साल पहले आग लगने की दो घटनाएं हुई थीं। इसी तरह छिवली में भी आग लगने की घटना हुई। आग लगने में मिल की संपत्ति को नुकसान भी होना स्वाभाविक माना जा सकता है। मिल प्रशासन की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही कारण रहे कि आग लगने के कारण आज तक दबे ही रहे।
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लक्ष्मी ग्रुप को सेंट्रल बैंक, यूनियन बैंक, स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, बीओबी, पंजाब नेशनल, एसबीआई और एचडीएफएसी बैंक की 16 शाखाओं ने लोन दिया था। बैंकों ने मिलें बंद होने और रकम डूब जाने की एनसीएलटी को रिपोर्ट दी थी। मिलों की की पांच अगस्त को नीलामी लगी थी लेकिन तकनीकी कारणों से नीलामी नहीं हुई। लक्ष्मी काटसन मिल की जिले में अरबों की संपत्ति है। सौंरा, मलवां, रहसूपुर रेवाड़ी और अभयपुर में हाईवे के किनारे करोड़ों की कीमत के प्लांट लगे थे। मिलें लगाने के लिए ढाई से 300 बीघे जमीन भी मालिकानों ने खरीदी थी। संपत्ति की कीमत अरबों रुपये है। फैक्ट्री बंद होने से कई प्रदेशों और जिले के करीब 2900 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। कर्मचारियों का ढाई साल का वेतन व लाखों रुपये एरियर का बकाया है।
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लक्ष्मी काट्सन का गठन 31 अगस्त 1988 को हुआ था। इसका मुख्यालय कानपुर में है। कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल हैं और वही इसका संचालन कर रहे थे। कंपनी की हैसियत 2900 करोड़ की रही है। लक्ष्मी काटसन होम फर्नीशिंग, डेनिम फैब्रिक, तौलिया, लेनिन के कपड़े, टेक्रिल टेक्सटाइल और कॉटन बनाती है। कंपनी के उत्पादों की देशभर और विदेशी बाजारों तक में पहुंच है। मिल में सैन्य सप्लाई की बुलेट प्रूफ जैकेट और वर्दी के कपड़े भी बनाए जाते थे।
सीबीआई की छापेमारी से दिनभर चर्चाएं रहीं। औद्योगिक क्षेत्र में चर्चा रही कि खेल ये भी हो सकता है कि कंपनी अपने फंड कागजी तौर पर छिपाकर खुद को दीवालिया घोषित कराने में लगी है, ताकि कर्ज में रियायत मिल सके। इसी खेल को उजागर करने के लिए सीबीआई ने छापा मारा है। दरअसल, पूर्व में कंपनी के वेलस्पन नाम की कंपनी में विलय की कवायद शुरू हुई लेकिन जब वेलस्पन ने मौका मुआयना किया तो फैक्ट्री से मशीनें गायब मिलीं। इन्हीं कारणों से न तो कंपनी का विलय हो पाया और न ही इसकी नीलामी हुई।
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