कानपुर देहात। जिला अस्पताल का जनरल वार्ड 48 बेड का है। यहां पर बुधवार को 57 मरीज भर्ती मिले। इससे एक बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार किया गया। इसमें कोई उलटी दस्त तो कोई बुखार से पीड़ित है। तीमारदारों ने इसका विरोध किया तो पैरामेडिकल स्टाफ ने कहीं और मरीज का उपचार कराने की बात कही।
डेंगू और बुखार के मरीज बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की दुश्वारियां भी बढ़ रही हैं। 48 बेट के जनरल वार्ड में बुधवार को 57 मरीज भर्ती किए गए। इससे एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जाता रहा। तीमारदार विशाल कुमार ने बताया कि सुबह चिकित्सक मरीज को देख गए थे। इसके बाद दोपहर होते ही स्टाफ ने उनके मरीज के साथ एक अन्य युवक को लिटा दिया।
उसे तेज बुखार आ रहा था। उन्होंने बताया कि कोविड पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। विशाल ने पैरामेडिकल स्टाफ से एक बेड पर एक ही मरीज भर्ती करने की बात कही तो उसे अपने मरीज का कहीं और उपचार कराने की सलाह दी गई। यही स्थिति मायादेवी, सीमा के मरीजों के साथ थी।
वहीं, बुधवार को चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी बंद रही तो बाल रोग विशेषज्ञ भी ओपीडी से नदारद रहे। दोपहर 12 बजे तक महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर लाइन में लगी रहीं, इसके बाद भी चिकित्सक के न आने पर वापस लौट गईं। इसके साथ ही अस्पताल में महिलाओं के लिए बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां भी नहीं हैं।
जिला अस्पताल से नदारद हो गई हेल्प डेस्क
जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई थी। जैसे-जैसे कोरोना का असर कम होता गया वैसे ही यहां की सुविधाएं भी नदारद होने लगी। अब हेल्प डेस्क के नाम पर खिलवाड़ हो रहा। मौके पर बैनर तो लगा है पर यहां न तो कोई मेज व कुर्सी लगी है और ना ही कोई कर्मचारी दिखाई दिया।
जिला अस्पताल में एक बेड में दो मरीजों को लिटाने का कोई नियम नहीं है। इसके समाधान करने के लिए सीएमएस से कहा है। जल्द ही ओपीडी का औचक निरीक्षण करेंगे। - डॉ. एके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी