किशोरी को भेजता था अश्लील मैसेज
स्कूल आने पर प्रधानाचार्य ने फिर से स्कूल में पढ़ाने या एकमुश्त 74 हजार रुपये फीस देने पर ही मार्कशीट देने की बात कही। वह फोन पर किशोरी को अश्लील मैसेज भी भेजता था। मजबूरी में फंसी छात्रा ने प्रधानाचार्य की हरकतों को रिकॉर्ड कर सबूत इकट्ठा करने लगी और स्कूल जाना शुरू कर दिया।
कॉल रिकॉर्डिंग व वीडियो हुए थे रिकवर
चार सितंबर 2020 को शक होने पर प्रधानाचार्य ने किशोरी का मोबाइल छीना और सभी फोटो और वीडियो लैपटॉप में ट्रांसफर कर मोबाइल से सारा डाटा डिलीट कर दिया। इसे पहले छात्रों ने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग व वीडियो अपनी ई-मेल पर सेव कर लिए थे, जो बाद में रिकवर हो गए। अगले दिन वह स्कूल गई।
कोर्ट में पेश किए गए थे पांच गवाह
इसके बाद फोटो व वीडियो का गलत इस्तेमाल करने से मना किया, तो बदसलूकी कर उसे स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। तब छात्रा ने मां के साथ थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता व अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि अभियोजन की ओर से पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए।
दोबारा तय किए गए आरोप
अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पॉक्सो कोर्ट में पहले 16 जुलाई 2022 को किशोरी से दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में प्रधानाचार्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे लेकिन घटना एक स्कूल में हुई थी और अभियुक्त स्कूल का प्रधानाचार्य था। इस आधार पर आपत्ति जताने पर कोर्ट ने 27 जुलाई 2022 को दोबारा पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में आरोप तय किया था।
पीड़िता बालिग, अभियुक्त को दुष्कर्म में सुनाई सजा
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि दस्तावेजों के आधार पर पीड़िता की जन्मतिथि 14 मई 2001 मानी गई। घटना मई 2019 व 2020 की थी। घटना के समय पीड़िता बालिग थी, इसलिए प्रधानाचार्य को पॉक्सो एक्ट का अपराधी नहीं माना गया। कोर्ट ने उसे युवती से दुष्कर्म का आरोपी मानकर सजा सुनाई।