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छात्रा से दुष्कर्म, प्रधानाचार्य का सजा: तीन साल पुराना मामला...78 पेज का फैसला, स्कूल में किया था कुकृत्य

Sat, 26 Aug 2023 05:15 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: चार सितंबर 2020 को शक होने पर प्रधानाचार्य ने किशोरी का मोबाइल छीना और सभी फोटो और वीडियो लैपटॉप में ट्रांसफर कर मोबाइल से सारा डाटा डिलीट कर दिया। इसे पहले छात्रों ने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग व वीडियो अपनी ई-मेल पर सेव कर लिए थे, जो बाद में रिकवर हो गए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में अपने ही स्कूल की छात्रा (शिक्षिका भी) से दुष्कर्म करने वाले स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुरेंद्र पाल सिंह ने 20 साल कैद और 55 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 78 पेज के फैसले में जुर्माने की रकम से 50 हजार रुपये पीड़िता को देने के आदेश भी दिए हैं।

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दरअसल, स्कूल की फीस बकाया होने के कारण इंटर की परीक्षा में पास करने के बाद भी छात्रों को हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट नहीं दी गई थी। छात्रा के भाई-बहन भी वहीं पढ़ते थे, उनकी मार्कशीट भी नहीं दी थी। प्रधानाचार्य ने छात्रा से कहा कि अगर वह स्कूल में पढ़ाने लगे, तो उसकी फीस माफ कर देंगे।
मई 2019 में किशोरी ने पढ़ाना शुरू कर दिया, तो कुछ दिन बाद प्रधानाचार्य ने उसे स्कूल में रोका और छेड़खानी की। किसी को बताने पर मार्कशीट न देने की धमकी दी। डर के कारण किशोरी किसी रिश्तेदार के यहां चली गई। कई महीने बाद लौटी और प्रधानाचार्य से फोन पर मार्कशीट देने की बात कही तो उसे स्कूल बुलाया।

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किशोरी को भेजता था अश्लील मैसेज
स्कूल आने पर प्रधानाचार्य ने फिर से स्कूल में पढ़ाने या एकमुश्त 74 हजार रुपये फीस देने पर ही मार्कशीट देने की बात कही। वह फोन पर किशोरी को अश्लील मैसेज भी भेजता था। मजबूरी में फंसी छात्रा ने प्रधानाचार्य की हरकतों को रिकॉर्ड कर सबूत इकट्ठा करने लगी और स्कूल जाना शुरू कर दिया।

कॉल रिकॉर्डिंग व वीडियो हुए थे रिकवर
चार सितंबर 2020 को शक होने पर प्रधानाचार्य ने किशोरी का मोबाइल छीना और सभी फोटो और वीडियो लैपटॉप में ट्रांसफर कर मोबाइल से सारा डाटा डिलीट कर दिया। इसे पहले छात्रों ने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग व वीडियो अपनी ई-मेल पर सेव कर लिए थे, जो बाद में रिकवर हो गए। अगले दिन वह स्कूल गई।

कोर्ट में पेश किए गए थे पांच गवाह
इसके बाद फोटो व वीडियो का गलत इस्तेमाल करने से मना किया, तो बदसलूकी कर उसे स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। तब छात्रा ने मां के साथ थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता व अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि अभियोजन की ओर से पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए।

दोबारा तय किए गए आरोप
अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पॉक्सो कोर्ट में पहले 16 जुलाई 2022 को किशोरी से दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में प्रधानाचार्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे लेकिन घटना एक स्कूल में हुई थी और अभियुक्त स्कूल का प्रधानाचार्य था। इस आधार पर आपत्ति जताने पर कोर्ट ने 27 जुलाई 2022 को दोबारा पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में आरोप तय किया था।
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पीड़िता बालिग, अभियुक्त को दुष्कर्म में सुनाई सजा
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि दस्तावेजों के आधार पर पीड़िता की जन्मतिथि 14 मई 2001 मानी गई। घटना मई 2019 व 2020 की थी। घटना के समय पीड़िता बालिग थी, इसलिए प्रधानाचार्य को पॉक्सो एक्ट का अपराधी नहीं माना गया। कोर्ट ने उसे युवती से दुष्कर्म का आरोपी मानकर सजा सुनाई।
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