साधन सहकारी समिति पट्टी (ठठिया) में लगा ताला।
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कन्नौज। बारिश की मार झेल चुके किसानों ने नुकसान से उबरने के लिए आलू और सरसों की दोबारा बुवाई शुरू की है। यूरिया और डीएपी खाद की किल्लत ने इन्हें मुश्किल में डाल दिया है। जिले में शासन से निर्धारित लक्ष्य से बेहद कम आपूर्ति हुई है। अब दोबारा बुवाई से जरूरत में इजाफा हो गया है। ऐसे में किसान खाद के लिए सहकारी समितियों और निजी दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। निजी उर्वरक विक्रेता खाद को तय दामाें से ज्यादा में बेच रहे हैं।
जिले में हर साल करीब दो लाख किसान 50 हजार 250 हेक्टेयर में आलू की बुवाई करते हैं। पैदावार करीब 12 लाख छह हजार मीट्रिक टन होती है। करीब 50 हजार किसान 10 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल लेते हैं। बेमौसम बारिश से करीब 40 फीसदी आलू और 60 फीसदी सरसों की फसल नष्ट हो गई है।
शासन स्तर से लक्ष्य से बेहद कम डीएपी, यूरिया और एनपीके की आपूर्ति से पहले ही संकट था। दोबारा बुवाई में जरूरत ने स्थिति बेहद गंभीर कर दी है। खेतों को तैयार करने के बाद किसान खाद और बीज के लिए भटक रहे हैं। जिले की 48 साधन सहकारी समितियों और 525 निजी दुकानों पर खाद की कमी है। स्टाक डंप करने वाले दुकानदार कालाबाजारी कर रहे हैं।