कन्नौज। दोमुंहा सांपों की तस्करी के मामले में तीन सपेरों की गिरफ्तारी के बाद वन विभाग और पुलिस टीम के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले से दोमुंहा सांप (रेड सेंड बोआ) की तस्करी विदेशों तक होती है। इसके मांस से लेकर खाल तक का प्रयोग होता है। इससे विदेशों में इस दुर्लभ प्रजाति की काफी मांग है।
वन निरीक्षक प्रमोद कुमार और सतीश कुमार ने शनिवार की रात करीब नौ बजे बस स्टॉप सरायमीरा से सपेरा कंचन नाथ, मोहित नाथ (निवासी बरौली, थाना इंदरगढ़) और मोहित पाल (निवासी राजेपुर जमान, बांगरमऊ, उन्नाव) को गिरफ्तार किया था। इनके पास से दोमुंहा दो सांप बरामद हुए थे। वन निरीक्षक सतीश कुमार ने इन्हें कोतवाली पुलिस को सौंपते हुए दुर्लभ प्रजाति के सांपों की तस्करी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की पूछताछ सामने आया कि जिले के सपेरा दोमुंहा सांपों को पकड़ते हैं। मोहित पाल इन्हें दो से तीन हजार रुपये में खरीद कर अपने साथ ले जाता है।
पूछताछ के दौरान मोहित पाल ने बताया कि वह अज्ञात लोगों को पांच से आठ हजार रुपये में सांपों को बेच देता है। यह खरीदार लखीमपुर से नेपाल ले जाते हैं। खरीदारों ने बताया कि विदेशों में इस सांप के मांस से यौन वर्धक दवाएं और खाल से पर्स व बेल्ट तैयार की जाती है। इससे पुलिस ने अब सांपों की तस्करी और बेचने वाले लोगों की तलाश में छानबीन शुरू कर दी है। जिला वन अधिकारी जवाहर लाल गुप्ता ने बताया कि देश में दोमुंहा सांप का एक ही मुंह होता है। खतरे की आशंका पर यह पूंछ को समेट कर जमीन और रेत में घुस जाता है। तस्करी के चलते इनकी संख्या कम हो रही है। इससे 1972 में सरकार ने इन सांपों को बचाने के लिए इन्हें मारने और तस्करी पर प्रतिबंध लगा दिया। कोतवाल आलोक कुमार दुबे ने बताया कि सांपों की तस्करी करने वाले अन्य लोगों की तलाश में छानबीन कर दबिश दी जा रही है।
जिले में कौड़ियों के भाव, विदेश में लाखों में मांग
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दोमुंहा सांप को पकड़ने वाले सपेरों को दाम बहुत कम मिलते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम लाखों में हो जाते हैं। वन दरोगा सतीश कुमार ने बताया कि चीन, इंडोनेशिया और नेपाल में यह सांप दो से तीन लाख रुपये तक में वजन के हिसाब से बिकते हैं।