प्रदीप के गमगीन बेटे और बेटियां।
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कन्नौज/तालग्राम। डेंगू से पिता की मौत के एक माह बाद इकलौते बेटे की भी इलाज के दौरान एम्स दिल्ली में मौत हो गई। वहीं इसी गांव के एक अन्य व्यक्ति ने भी बुखार से दम तोड़ दिया। अब जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या 101 हो गई है। दो माह बाद मंगलवार को एलाइजा जांच में एक भी डेंगू का मरीज नहीं मिला। वहीं रैपिड किट से जांच में एक मरीज पॉजिटिव निकला।
तालग्राम प्रतिनिधि ने बताया कि कुशलपुर्वा गांव निवासी प्रदीप कुमार (27) खेती के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। डेंगू से पिता सुरेंद्र (48) की 11 अक्तूबर को मौत हो गई थी। पिता की मौत के दूसरे दिन प्रदीप भी बुखार की चपेट में आ गए। कस्बे के झोलाछाप से इलाज में आराम न होने पर कासगंज में भर्ती कराया गया। यहां डेंगू की पुष्टि होने पर डॉक्टर ने आगरा रेफर कर दिया। वहीं से पांच दिन पहले एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान मौत हो गई। पत्नी पूनम ने बताया कि ससुर की डेंगू से मौत के बाद पति की भी इसी से जान चली गई। पांच बेटियां अन्नू (8), एकता ( 7), रिया (6), गुल्लू (5), प्राची (4) और एक बेटा गोविंद(2) है। वहीं गांव के हरीराम पाल (58) आठ दिन से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। सोमवार देर शाम मौत हो गई। बेटे सतीशचंद्र ने बताया कि डॉक्टर ने सोमवार को बाहर ले जाने की सलाह दी थी। कानपुर जाने का इंतजाम कर रहे थे, तब तक मौत हो गई।
इधर, राजकीय मेडिकल कालेज से आई एलाइजा रिपोर्ट में डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला। ऐसा करीब दो माह बाद हुआ है। जिला अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी में 656 मरीजों ने इलाज कराया। इसमें 32 बुखार के मरीज थे। इनकी रैपिड टेस्ट किट से जांच की गई। एक मरीज डेंगू पॉजिटिव मिला। जिले में एलाइजा जांच में 1175 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। रैपिड टेस्ट किट से जांच में 472 मरीज डेंगू पॉजिटिव मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमाें ने एक दर्जन से अधिक गांवों में कैंप लगाकर बुखार पीड़ितों की जांच कर दवाओं का वितरण किया।