कन्नौज। कोरोना की दूसरी लहर के बाद मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का आयोजन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में आरोग्य मेले में कम लोग ही पहंचे, जबकि कोरोना से पहले 4000 मरीज इलाज के लिए पहुंचते रहे हैं। आरोग्य मेला जिले के सभी पीएचसी और स्वास्थ्य उप केंद्रों पर आयोजित किया गया। मरीज न पहुंचने से डॅाक्टर से लेकर कर्मचारी पूरे दिन बैठे रहे।
डेंगू समेत अन्य रोगों से मरीजों को निजात दिलाने के लिए रविवार को लगने वाले मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले को दोबारा शुरू किया गया। मेले का पहला दिन प्रचार प्रसार के अभाव में कम लोग अस्पताल पहुंचे। मरीजों की संख्या कम होने के कारण अस्पतालों में पहुंची टीम आराम करती रही। जो मरीज जानकारी होने पर पहुंचे उनको दवा दी गई। इससे पहले मुख्य मंत्री जन आरोग्य मेले में तीन से चार हजार रोगी पहुंच कर मेले का लाभ लेते रहे हैं।
इस बार के मेले की लोगों को जानकारी ही नहीं हो सकी। डेंगू बुखार और बुखार के रोगियों की भरमार के चलते रविवार को मेला लगने की जनता भले सराहना कर रही है पर इस मेले में मरीज नहीं दिखे। मानीमऊ हो या इंदरगढ़, जिला मुख्यालय का मकरंदनगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी सन्नाटा पसरा रहा। बाद में जानकारी होने पर कुछ मरीज पहुंचे इनकी जांच कर इलाज किया गया।
यहां डा. अर्चना, डॉ. आकांक्षा, डॉ. अंजली नैयर, फार्मासिस्ट रवि राज, सुभ्र सिंह, गीता, कुशुमलता, दीपिका स्टाफ मरीजों का इंतजार करते रहे। यही हाल अन्य अस्पतालों में था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में 2252 मरीजों के उपचार की बात कही गई। मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेले पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि बीते कई महीनों से कोरोना के चलते मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला आयोजित नहीं हो पा रहा था। अब इसे शुरू किया गया है। पहला दिन होने से मरीज अधिक तो नहीं पहुंचे पर 2252 ने उपचार लिया है।
आयुष्मान गोल्डन कार्ड भी बना
मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में आयुष्मान भारत योजना के स्टाल लगा कर 250 लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड भी बनाए गए। नोडल अधिकारी डॉ. जेपी सलोनिया ने बताया कि प्रत्येक रविवार को स्वास्थ्य मेले में प्रयास होगा कि ज्यादा से ज्यादा केंद्रों पर कैंप लगा कर लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड की सुविधा प्रदान की जाए।
मेले में मिलीं सुविधाएं
मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों में गोल्डन कार्ड बनवाने, गर्भावस्था एवं प्रसवकालीन परामर्श, पूर्ण टीकाकरण एवं परिवार नियोजन संबंधी साधनों एवं परामर्श की व्यवस्था रही। इसके साथ ही संस्थागत प्रसव संबंधी जागरूकता, जन्म पंजीकरण परामर्श, नवजात शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा परामर्श एवं सेवाएं, बच्चों में डायरिया एवं निमोनिया की रोकथाम के साथ ही टीबी, मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, कुष्ठ आदि बीमारियों की जानकारी, जांच एवं उपचार की निऱ्शुल्क सेवाएं दी गई। पीएचसी पर जो जांचें नहीं हो पाईं उन मरीजों को जांच के लिए सीएचसी अथवा जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया।