कन्नौज/मानीमऊ। अगरबत्ती फैक्टरी में पिसाई के दौरान धमाके के बाद लगी आग से झुलसे मजदूर अवधेश ने सोमवार देर रात कानपुर के उर्सला अस्पताल में दम तोड़ दिया। दो की हालत नाजुक है। जीतू की हालत गंभीर होने पर परिजनों ने कानपुर के मरियमपुर अस्पताल में भर्ती कराया है। डेढ़ माह पहले इसी अगरबत्ती फैक्टरी में धमाके के बाद लगी आग में चार मजदूर झुलस गए थे। उपचार के दौरान इनकी मौत हो गई थी। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन ने फैक्टरी को न तो सील किया न ही कठोर कार्रवाई की।
सदर कोतवाली इलाके के हरदोई रोड तिराहे के पास शहर के मोहल्ला हाजीगंज निवासी राजू खां उर्फ अब्दुल बारी की अगरबत्ती फैक्टरी है। सोमवार सुबह फैक्टरी में छह मजदूर काम कर रहे थे। मशीन से चिंगारी निकलने पर धमाके के साथ आग लग गई। हाल का शटर बंद होने से सभी मजदूर झुलस गए। इनमें सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव उदैतापुर निवासी मजदूर अवधेश(25) पुत्र रामसनेही, अवधेश उर्फ जीतू यादव(40) पुत्र बालक राम यादव, अवधेश दोहरे(40) पुत्र बालकिशन दोहरे गंभीर रूप से झुलस गए। इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर कानपुर रेफर कर दिया गया। कानपुर के उर्सला अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात अवधेश दोहरे की मौत हो गई। जानकारी पर परिजनों में कोहराम मच गया। अवधेश यादव उर्फ जीतू यादव को उर्सला से रेफर कर दिया गया। मंगलवार सुबह एलआईयू इंसपेक्टर फतेह बहादुर सिंह गांव उदैतापुर पहुंचे। अवधेश दोहरे के परिजनों से फैक्टरी में काम की बाबत जानकारी ली।
फैक्टरी में पीसा जाता सोरा और बर्नी विस्फोटक पदार्थ
उदैतापुर निवासी मजदूर हुकुम सिंह, लाल सिंह ने बताया कि वह इस फैक्टरी में काम करते हैं। यहां अगरबत्ती मसाला की जगह सोरा और बर्नी की पिसाई होती थी। सोरा की पिसाई की बात जीतू ने भी जिला अस्पताल में अपने बयान के दौरान कही थी। बताया गया कि बड़े हाल में पिसाई होती थी। इसकी दीवारें 18 इंच की हैं। इससे कि हादसा होने पर दीवारें क्षतिग्रस्त न हों। पिसाई के समय दोनों शटरों को बाहर से बंद कर दिया जाता था। आग लगने के समय छह मजदूर काम कर रहे थे। तीन मजदूर मशीन पर पिसाई और तीन विस्फोट को खाली बोरियों में भर रहे थे। मशीन ज्यादा गर्म होने पर हादसे की नौबत बन जाती है। बोरियों में पिसे हुए माल को भरने वाले आग लगने पर हाल में बनी छोटी दीवारों के पीछे छिप कर निकल आते हैं। इससे वह आग की चपेट में नहीं आते थे।
दो घंटे पिसाई के आठ सौ रुपये
उदैतापुर के गोविंद ने बताया कि वह इस फैक्टरी में पिसाई कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि यहां बारूद की पिसाई होती थी। बंद कमरे में पिसाई की जाती थी। दो घंटे की शिफ्ट में काम होता था। दो घंटे पिसाई के आठ सौ रुपये मिलते थे। तीन लोग मशीन चलाते हैं। तीन लोग बारूद को हौद से निकाल कर बोरियों में पैक करते थे। हादसा होने पर मशीन चलाने वाले ज्यादा घायल होते हैं। मशीन में ही धमाका होता है। बोरी भरने वाले दूरी पर होते हैं। इससे बच जाते हैं।
पहली घटना में नहीं की गई कठोर कार्रवाई
डेढ़ माह पहले इसी अगरबत्ती फैक्टरी में आग से हरदोई जनपद के चार मजदूरों की मौत के बाद भी प्रशासन ने न तो फैक्टरी को सील किया, न ही कठोर कार्रवाई की। इसी से मजदूरों की मौत के बाद भी चंद दिनों में फैक्टरी में फिर से पिसाई का काम शुरू कर दिया गया। फैक्टरी को सील कर कार्रवाई की गई होती तो यह हादसा नहीं होता।
फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार
अगरबत्ती फैक्टरी में धमाके के साथ लगी आग में मजदूर की मौत और दो के गंभीर होने के मामले में पुलिस ने अवधेश के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने फैक्टरी मालिक अब्दुल बारी उर्फ राजू खां को गिरफ्तार कर लिया है।
उदैतापुर निवासी बालकिशन ने अगरबत्ती फैक्टरी धमाके में मालिक अब्दुल बारी उर्फ राजू, अब्दुल्ला हारौन और दाउद हारौन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने अब्दुल बारी को सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया है।