चिरगांव (झांसी)। भांडेर से चिरगांव मार्र्ग पर छिरौना गांव के पास घटनास्थल पर देर शाम तक लोगों की भीड़ लगी रही। राहगीर भी घटनास्थल पर रुककर देखते रहे। वहां पर अभी तक महिलाओं की चप्पलें और कपड़े पड़े हैं। आसपास खून भी पड़ा है। मंदिर में चढ़ाने के लिए लाए जा रहे जवारे भी खंदक में पड़े हैं। लोगों का कहना है कि अगर खंदक में पानी न भरा होता तो इतना पड़ा हादसा न होता। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में भांडेर-चिरगांव मार्ग बनाया गया है। इसकी वजह से इस मार्ग पर वाहन भी तेज रफ्तार चलते हैं। मार्ग पर स्पीड ब्रेकर भी नहीं बनाए गए हैं।
घटना कितनी भयावह थी, इसका अंदाजा तो मौके के हालात देखकर ही लगाया जा सकता है। हादसे में जान गंवाने वाली महिलाओं की चप्पलें पानी में तैर रही थीं। कुछ चप्पलें खंड के किनारे भी पड़ी थीं। कपड़े भी पानी में बिखरे पड़े थे। सड़क के किनारे घायलों का खून भी पड़ा था। दशहरे पर इतना बड़ा हादसा होने से लोगों की खुशी गम में बदल गई। हादसे के बाद दुर्गा मां की मूर्तियों का श्रद्धालुओं ने नहर में सादगी से विसर्जन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिरगांव में अभी तक इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ था जिसमें 11 लोगों की जान चली जाए।
सीएचसी के डॉक्टर की आंखें भी हुईं नम
झांसी। चिरगांव में हादसा होने के बाद सभी के शव सबसे पहले सीएचसी ला गए। वहां पर एक तरफ महिलाओं के शवों को रखा गया और दूसरी तरफ चारों बच्चों के शवों को रखा। बच्चे तो ऐसे लग रहे थे कि वह सो रहे हों। सीएचसी में तैनात डॉक्टर ने बच्चों के शवों को देखा तो उनकी आंखों से भी आंसू आ गए। उनका कहना था कि अभी तक इस तरह की मौत उन्होंने नहीं देखी है।