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सावन का पहला सोमवार आज, भोले की भक्ति में डूबा शहर

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भूतनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालु। अमर उजाला
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सावन का पहला सोमवार आज, भोले की भक्ति में डूबा शहर
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झांसी। सावन के पहले सोमवार को आज महानगर शिवमय हो गया। शिवालयों में ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक एवं रुद्री पाठ शुरू हो गए। जलाभिषेक और पूजा अनुष्ठान के लिए समस्त तैयारियां कर ली गईं थीं।
महानगर के पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, बाहर बड़ागांव गेट स्थित भूतनाथ मंदिर, राजा बाबा महाकालेश्वर मंदिर, मृत्युंजय मंदिर सहित समस्त शिवालयों में सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। भक्तों ने शिवालयों में झालरों से सजावट की है। कोविड नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को गर्भ गृह में प्रवेश किया जाएगा।
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इधर बुंदेलखंड कांवड़ यात्रा समिति सावन पर जगह-जगह पौधारोपण करेगी। आयोजक संजीव श्रृंगी ऋषि ने बताया कि सावन के महीने में समिति 51000 पौधों को बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में लगाएंगी। इसके साथ ही भगवान आशुतोष का प्रत्येक सोमवार को अभिषेक करेगी। समिति द्वारा प्रत्येक सोमवार को टीकाकरण कैंप का भी आयोजन करेगी। झांसी में सभी कार्यक्रम के संयोजक नीरज सिंह होंगे।
सावन में रहेंगे 9 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग
भगवान शिव के प्रिय पावन महीने में 9 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। 29 और 30 जुलाई, अगस्त में 4, 6, 8, 14, 16, 20 व 21 को यह योग रहेगा। आचार्य शांतनु पांडे के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग में भगवान शिव की पूजा विशेष महत्व है। 8 अगस्त को रवि पुष्य योग रहेगा और हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी। सावन के पहले सोमवार को घनिष्ठा नक्षत्र और सौभाग्य योग रहेगा।
भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं भूतनाथ
झांसी। महानगर के श्रद्धालुओं में भूतनाथ मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां 11 सोमवार भगवान के दर्शन करने पर भगवान भूतनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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लक्ष्मी ताल के तट पर मौजूद इस शिवालय में महाशिवरात्रि हो अथवा सावन संपूर्ण वर्ष भर श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शनों के लिए उमड़ते हैं। शिवरात्रि पर भगवान भूतनाथ की कई दशकों से भव्य बरात भी निकाली जाती है। मान्यता है कि यह मंदिर 400 वर्ष पुराना है। मंदिर परिसर में नंदी की जोड़ी में मूर्ति है। भगवान गणेश की भी दो मूर्तियां हैं। हालांकि इनकी सूढ अलग-अलग दिशाओं में है। जहां अधिकांश शिवालयों में जल लहरी गोलाकार होती है। भूतनाथ मंदिर में जल लहरी चौकोर में है। मंदिर में ही सिद्ध बाबा की प्राचीन गुफा है। यहां नाग पंचमी पर श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं।
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