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स्मार्ट क्लास बनाने का ढिंढोरा, प्राथमिक विद्यालय में 47 साल से अंधेरा

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अंदर सैंयर गेट का प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय। अमर उजाला
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झांसी। स्मार्ट सिटी झांसी में स्मार्ट शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्कूलों का नवीनीकरण, स्मार्ट क्लास बनाने का ढिंढोरा पीट कर अफसर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन शहर में एक स्कूल ऐसा भी है जहां दशकों से अंधेरा पसरा हुआ है। जी हां, सैंयर गेट स्थित प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय का 47 साल से विद्युतीकरण नहीं हुआ है। 165 बच्चों वाले इस स्कूल में गर्मी से सभी का हाल बेहाल है। बिजली न होने से किचिन से लेकर शौचालय तक में पानी की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों को रोशन करने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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प्राथमिक विद्यालय की स्थापना सन 1974 में हुई थी। मौजूदा समय में यहां पर 18 साल से तैनात एक महिला कर्मचारी ही सबसे पुरानी है। इससे पहले पोस्टिंग पाने वाले शिक्षक, कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। महिला ने बताया कि पिछले तीन दशक से कभी भी विद्यालय में बत्ती जलती नहीं देखी। पिछले साल तक तो यहां बिजली के बोर्ड और गार्डिंग भी नहीं थी। कुछ महीने पहले ही स्टाफ ने खुद पैसा इकट्ठा करके बोर्ड, गार्डिंग लगवाई है। साथ ही बीती जनवरी में विद्युत विभाग में कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। चूंकि, अभी सिक्योरिटी मनी जमा होना बाकी है। ऐसे में कनेक्शन नहीं मिल सका है।
गर्मी में बिलबिला उठते नौनिहाल
कक्षा एक से पांचवीं तक के इस स्कूल में पंखा नहीं चलने की वजह से गर्मी में नौनिहाल बिलबिला उठते हैं। हाल ये है कि जिस किताब-कॉपी से उन्हें पढ़ाई करनी चाहिए, उससे वह हवा करते रहते हैं। वहीं, बदली छा जाने पर स्कूल में अंधेरा भी हो जाता है।
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बिजली नहीं तो पानी भी नहीं
बिजली न होने से स्कूल में मोटर का भी कनेक्शन नहीं है। ऐसे में स्कूल के स्टाफ को बाहर जाकर हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है। मिड डे मील का भोजन बनाने के लिए भी बाहर से पानी लाते हैं। इसके अलावा शौचालय तक में पानी की व्यवस्था नहीं है।
स्टाफ का ये कहना
वर्ष 2014 से इस विद्यालय में हूं। कभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं रहा। बच्चे गर्मी में परेशान होते हैं। बच्चों के लिए पीने का पानी भी बार-बार बाहर से भरकर लाना पड़ता है। - नजमी शमी, शिक्षिका।
स्कूल के पास ही घर है। पिछले 30 सालों से विद्यालय में कभी लाइट जलती नहीं देखी। 2003 में यहां मेरी नौकरी लग गई। तब से आज तक कभी बिजली कनेक्शन नहीं हो सका। - शीला, कर्मचारी।
बिजली न होने से पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती है। मिड डे मील का भोजन बनाने के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है। गर्मी की वजह से कई बार बच्चे घर भी चले जाते हैं। - रानी, रसोइया।
पिछले दस साल से विद्यालय में हूं। तब से आज तक तो कभी बिजली रही नहीं। यहां पर तो बिजली के बोर्ड, गार्डिंग भी नहीं थी। कुछ महीने पहले स्टाफ ने पैसे इकट्ठे कर इन्हें लगवाया है। जनवरी में बिजली विभाग में कनेक्शन के लिए आवेदन भी किया है। सिक्योरिटी फीस देनी बाकी है। वो भी पैसे इकट्ठा करके दे देंगे। - मंजू अग्रवाल, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय सैंयर गेट।
सिर्फ पांच स्कूलों को छोड़कर सभी में विद्युतीकरण हो चुका है। सैंयर गेट स्कूल के मामले की जानकारी की जाएगी। यदि बिजली नहीं है तो जल्द ही यहां विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था कराई जाएगी। - वेदराम, बीएसए।
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