झांसी। व्यवसायी की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के लोग तुरंत मेडिकल अस्पताल पहुंच गए। उसका छोटा भाई फफककर रो पड़ा। हेमंत सोमवार को भी अपना आरोप लगातार दोहरा रहा था। उसका कहना था कि उसके भाई ने फांसी नहीं लगाई बल्कि उसे बुरी तरह पीटा गया। हेमंत का कहना था कि घटना के वक्त वह खुद नवाबाद थाने के बाहर खड़ा था। पुलिस ने बेदर्दी से उसे पीटा था। इलाइट चौकी जाते समय यह बात खुद अजय ने उसे बताई थी। उसका कहना था कि बुरी तरह पिटाई की वजह से अजय ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। गंभीर रूप से घायल होने की वजह से उसका भाई फांसी नहीं लगा सकता। उसका कहना है कि जिस शौचालय की खिड़की से फांसी लगाने की बात कही जा रही वह सीमेंट की बनी हुई है। वह इतना भार सहन ही नहीं कर सकती। परिजनों ने मुख्यमंत्री से घटना की जांच कराए जाने की मांग की है।
एक कॉल की वजह से फंस गया था अजय
झांसी। व्यवसायी अरविंद के गायब होने के बाद अजय सोनी का नाम व्यवसायी के परिजनों ने भी नहीं लिया था लेकिन, एक कॉल ने अजय को मुसीबत में डाल दिया। दरअसल, अरविंद ने एक ट्रैक्सी ड्राइवर के फोन के मार्फत अजय से बात की थी। अरविंद की कॉल डिटेल्स में टैक्सी ड्राइवर का नंबर आ गया। उससे जब पुलिस ने कड़ाई की तब उसने अजय सोनी का नाम बता दिया। इसके बाद पूरा मामला ही पलट गया। पुलिस ने पूछताछ के लिए अजय को नवाबाद थाने बुलाया। जहां उसके साथ कुछ सिपाहियों ने जमकर मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की मारपीट की वजह से ही अजय की बुरी हालत हुई और उसे मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आई।
तेरह दिन में हैदराबाद से बरामद हो गया था गायब ट्रांसपोर्टर
जिस ट्रांसपोर्टर अरविंद गुप्ता के गायब होने के बाद पूछताछ के लिए अजय को नवाबाद थाने बुलाया गया था वह व्यापारी कर्जे से परेशान होेकर हैदाराबाद भाग गया था। पुलिस ने उसे पांच अक्तूबर को वहां से बरामद कर लिया हालांकि पुलिस का कहना है कि पूछताछ में लापता व्यवसायी ने बताया था कि गायब होने से पहले वह मेडिकल अस्पताल के पास अजय से मिला था। घर और पुलिस की गतिविधियों के बारे में जानने के लिए उसने अजय को मोबाइल और सिम दिलवाया था। पुलिस ने अरविंद के पास से नए फोन की रसीद भी बरामद की थी। बता दें, बरूआसागर के मिलान मोहल्ला निवासी अरविंद गुप्ता झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल अस्पताल के पास से 23 सितंबर को अचानक लापता हो गया था। उसकी पत्नी मुनन गुप्ता ने अपहरण का आरोप लगाते हुए नवाबाद थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उसके बाद पुुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। फोन सर्विलांस पर लगाए गए। अरविंद पहले यहां से सागर गया। उसके बाद पुरी पहुंचा। इसके बाद वह हैदराबाद निकल गया। पुलिस की टीम उसके पीछे लगी रही आखिरकार पांच अक्तूबर को वह उसकी गिरफ्त में आ गया।