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झांसी में विकास पर बातें ज्यादा हुईं काम कम, वर्षों से कागजों में हैं कई प्रोजेक्ट

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झांसी। जिले के विकास की कई परियोजनाएं सालों बाद भी फाइलों में ही कैद बनी हुईं हैं। इनकी फाइलें प्रदेश और केंद्र सरकार के गलियारों में चक्कर काट रही हैं, लेकिन अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच पा रहीं हैं। जन सहूलियतें व क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाली इन योजनाओं पर काम शुरू न हो पाने की वजह से विकास का पहिया अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
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घोषणाओं तक सीमित ग्वालियर मार्ग ओवरब्रिज
झांसी। ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण घोषणाओं तक सीमित हो कर रह गया है। साल 2020 में प्रदेश सरकार द्वारा संस्तुति किए जाने के बाद हाल ही में झांसी आए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसके निर्माण की एक बार फिर से घोषणा कर दी थी। जबकि, हकीकत में ओवरब्रिज निर्माण का दारोमदार रेलवे पर टिका हुआ है। अगस्त 2020 में हुई कई विभागों की संयुक्त बैठक में इसका खाका भी तैयार कर लिया गया है। 1.08 अरब की लागत से ये ब्रिज बनाया जाना था। इसमें 22 करोड़ का योगदान रेलवे को करना था। लेकिन, रेलवे की ओर से एक साल बाद भी इसकी मंजूरी नहीं दी गई है, जिससे मामला फंसा हुआ है।
सड़क चौड़ी होने के बाद बरकरार है जाम का झंझट
झांसी। जेल चौराहे से बिजौली तक के 11 किलोमीटर के मार्ग को चौड़ा कर फोरलेन बनाई जा रही है। बिजौली से हंसारी तक सड़क चौड़ी कर भी दी गई है। बावजूद, इस मार्ग पर जाम का झंझट बरकरार है, इसकी वजह है इस रोड पर हंसारी में बनी रेलवे क्रॉसिंग, जिस पर चौबीसों घंटे ट्रेनों की आवाजाही बनी रहती है। इससे चौबीस घंटे में तकरीबन आठ घंटे तक क्रॉसिंग बंद रहती है। क्रॉसिंग खुलने पर गाड़ियां आमने-सामने आ जाती हैं, जिससे जाम लगता है। यहां ओवरब्रिज निर्माण की कई बार घोषणाएं हुईं, लेकिन निर्माण के नाम पर कार्यवाही अब तक सिफर ही हैं।
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परवान नहीं चढ़ सकीं रोजगार की उम्मीदें
झांसी। डिफेंस कॉरिडोर को बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा रोजगार के भी इसमें असीम अवसर बताए जा रहे हैं। इसकी घोषणा 2019 में हुई थी और 2022 में इसे धरातल पर उतरना था। छह जिलों में बनने वाले इस गलियारे का सबसे बड़ा 59 प्रतिशत भाग झांसी में बनना था। इसके लिए उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा गरौठा क्षेत्र में 600 एकड़ जमीन खरीद भी ली गई है। दो कंपनियों ने एमओयू भी साइन भी कर लिया है। लेकिन, अब तक यहां किसी भी कंपनी ने जमीन नहीं ली है। ऐसे में फिलहाल औद्योगिक इकाई की स्थापना तो दूर की बात है।
15 साल से फ्लाईओवर को एनओसी का इंतजार
झांसी। ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर फोरलेन सड़क परियोजना के अंतर्गत एनएच - 25 के झांसी बाईपास पर सिमरधा के पास फ्लाईओवर बनाया जाना है, जो शिवपुरी मार्ग को सीधे कानपुर मार्ग से जोड़ेगा। फोरलेन निर्माण के साथ साल 2002 में इसका भी निर्माण शुरू किया गया था। लेकिन, सेना की आपत्ति के बाद 13 अक्तूबर 2006 को इसका निर्माण रोक दिया गया था। तब से अब तक इसके निर्माण को मंजूरी नहीं मिल पाई है। बीच में एनएचएआई ने फ्लाईओवर की जगह यहां चौराहा बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन इसे भी सहमति नहीं मिल पाई। पिछले 15 सालों से ये फ्लाईओवर अधूरा ही पड़ा हुआ है।
हवा में ही बना हुआ है हवाई अड्डा
झांसी। महानगर में हवाई अड्डे के निर्माण की कवायद पिछले 15 सालों से जारी है, लेकिन अब तक ये अपने मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है। साल 2013 में सदर तहसील के ग्राम सफा में इसके निर्माण का खाका तैयार किया गया था। इसके लिए यहां की 200 हेक्टेअर जमीन चिह्नित की गई थी। बाद में योजना में फेरबदल कर ग्वालियर रोड स्थित सेना की हवाई पट्टी का विस्तार कर हवाई अड्डा विकसित करने की योजना पर काम किया गया था। इसके लिए सिमरधा की 15 एकड़ जमीन चिह्नित की गई थी। डिजाइन भी बना ली गई थी। लेकिन, नतीजा सिफर ही है। हवाई अड्डा हवा में ही अटका हुआ है।
विकास की सभी परियोजनाओं पर काम जारी है। ग्वालियर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण स्मार्ट सिटी के तहत होगा। जबकि, इसके लिए पहले जो धनराशि तय की गई थी, उसे ललितपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर खर्च किया जाएगा। हवाई अड्डे का लैंड सर्वे जारी है। विकास की सभी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
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- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
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