झांसी। संचार क्रांति के दौर में बुंदेलखंड का सबसे बड़े शहरी विधानसभा के भीतर दो मजरे ऐसे हैं जहां आज तक बिजली के तार नहीं पहुंच सके। यहां रहने वाली करीब पांच हजार आबादी आज भी लालटेन काल में जी रही है। लोग रात में ढिबरी के सहारे दिन के उजाले का इंतजार करते हैं। हालत यह हैं कि बिजली न होने से यहां लोग शादी करने तक से कतराते हैं। मोबाइल चार्ज कराने को युवाओं को रोजाना दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पैसे देकर अपना मोबाइल चार्ज कराते हैं।
नगर निगम सीमा में शामिल हंसारी वार्ड के चौका पाटा एवं काला पाटा मजरे से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले ही बिजली के खंबे ठिठक गए। आज तक इन मजरों में लाइट नहीं पहुंच सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है हर चुनाव में बिजली पहुंचाने का वायदा होता रहा। इसके पूरा होने की उम्मीद में, वे हर चुनाव में शिरकत करते रहे लेकिन, आज तक यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। पिछले विधानसभा चुनाव में भी इसी के लिए वोट मांगे गए। अब करीब पांच वर्ष गुजर गए लेकिन, बिजली नहीं मिली।
बिजली न होने से यहां रहने वाले लोग आज भी ढिबरी के सहारे रात गुजराते हैं। फ्रिज, कूलर, टीवी जैसी जरूरत की चीजें यहां किसी काम की नहीं। घरों तक मोबाइल जरूर पहुंच चुका है। इसे चार्ज कराने के लिए उन्हें रोजाना दो किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है। दुकानदार को इसके एवज में पैसे देने पड़ते हैं। बिजली न होने से कोई यहां रिश्ता भी नहीं करना चाहता। लोगों का कहना है तीन दर्जन से अधिक युवक शादी की उम्र में हैं। उनके रिश्ते बात चलती है लेकिन, जब उनको मालूम चलता है कि यहां बिजली नहीं है तब वह अपनी बेटी का हाथ देने को राजी नहीं होते।
बल्लियों के सहारे कॉलोनी में बिजली के तार
महानगर के भीतर तीन दर्जन से अधिक कॉलोनियों मेें रहने वालों को कनेक्शन ही नहीं मिल रहा है जबकि कई कॉलोनियां ऐसी हैं जहां जुगाड़ के सहरे आज भी बल्लियों के सहारे तार दौड़ रहे हैं। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान उनसे विद्युतीकरण का वायदा किया गया लेकिन, तमाम कोशिशों के बावजूद अभी बल्लियां ही तारों का सहारा हैं। नागो जी का कुआं, पंचवटी, उन्नाव-बालाजी मार्ग पर भानी देवी स्कूल के पीछे, जूडेपुरा चर्च के पास, झोकन बाग, दरोगा का बाग, दतिया गेट बाहर, नरसिंह राव टौरिया, वर्मा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी, साकेत विहार समेत अन्य कॉलोनियों के लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कई बार विधायक ने भरोसा दिलाया लेकिन, अभी तक वायदा पूरा नहीं हुआ। इस वजह से अकसर यहां दुर्घटना की आशंका रहती है।
विधायक बोले, विद्युतीकरण पर दिया सबसे अधिक जोर
सदर विधायक रवि शर्मा का कहना है कि विद्युतीकरण से अछूते रह गए इन मजरों की समस्या मैंने खुद मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया है। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला है। जल्द ही यह समस्या दूर होगी। विधायक निधि के जरिए सबसे अधिक ध्यान विद्युतीकरण पर दिया। पांच साल के दौरान 60 से अधिक स्थानों पर विद्युतीकरण कराया। इसमें सीपरी बाजार में अन्नी गार्डन के पास लहर की देवी रोड पर एलटी लाइन का विस्तार, लहरगिर्द में विद्युतीकरण, महेंद्र पुरी एफसीआई गोदाम के पीछे विश्वकर्मा के मकान के आसपास का पूरा इलाका, सुम्मेरनगर ईसाईटोला, शिवपुरी-ग्वालियर बाईपास में रामलाल आश्रम के आसपास, बाहर उन्नाव गेट अंजनी माता मंदिर के आसपास, ग्वालियर रोड हवाई अड्डे के आसपास का इलाका, आईटीआई हरिकिशन डिग्री कॉलेज के समीप, लहरगिर्द में राजघाट स्टेट बैंक कॉलोनी के पीछे का मोहल्ला, रेलगंज, भट्टागांव, नगरा गढ़ियागांव, वार्ड 23 लहर एक्लेव, शांतिकुंज मांउट लिट्रा स्कूल के आसपास के पूरा इलाका, कुम्हार का कुआं, आईटीआई नहर के पास का इलाका, शास्त्रीनगर, गोंदू कंपाउंड समेत अन्य इलाकों में विद्युतीकरण का काम अपनी निधि से कराया। बुंदेलखंड विकास निधि से भी कई कॉलोनियों में विद्युतीकरण कराया है।
- पुरखों के जमाने से हमने मोहल्ले में बिजली नहीं देखी। हर चुनाव में वायदा किया जाता है लेकिन, आज तक समस्या जस की तस है।
महेंद्र यादव, चौका पाटा
- रात में लालटेन जलती है। इस वजह से रात में पढ़ाई नहीं हो पाती। मोबाइल भी हम लोगों को काफी दूर जाकर चार्ज कराना पड़ता है।
आकाश
बिजली न होने से लोग परेशान हैं। इस वजह से लोग मोहल्ले मेें रिश्ता करने से बचते हैं। रिश्ते की बात चलती है लेकिन, बिजली न होने की बात मालूम चलने पर कतराते हैं।
सुगर सिंह
बिजली न होने से घरों में टीवी, फ्रिज तक नहीं है। मोबाइल चार्ज कराने को काफी दूर जाना पड़ता है। हम लोग कई बार विधायक के पास गए लेकिन, हमारी समस्या जस की तस बनी हुई है।
रवींद्र
कॉलोनी के भीतर तार बल्लियों पर गए हैं। इसकी वजह से यहां दुर्घटना की आशंका रहती है। पिछले चुनाव मेें इस समस्या को दूर कराने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन, अभी तक यह समस्या बनी हुई है।
प्रमोद कुमार, नागो जी कुआं
कई कॉलोनियां में तार बल्लियों के सहारे लगे हैं। इसके लिए काफी कोशिश की गई लेकिन, यह समस्या अभी तक बनी हुई है।
डीसी गुप्ता, नागो जी कुआं