झांसी। प्रदेश और झांसी में क्रिकेट को शीर्ष पर पहुंचाने वाले उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के निदेशक मदन मोहन मिश्रा का सोमवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। महानगर के एक अस्पताल में उन्होंने दोपहर 11 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से महानगर में शोक की लहर दौड़ गई।
महानगर के सिविल लाइंस स्थित पाटवाला परिवार में वर्ष 1933 में मदन मोहन मिश्रा का जन्म हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा झांसी में ही हुई। क्रिकेट में रुचि होने के चलते वे कोई मैच देखना नहीं छोड़ते थे। झांसी में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1962 में झांसी क्रिकेट एसोसिएशन की नींव रखी। इसके बाद उन्होंने तमाम क्रिकेट टूर्नामेंट कराए। इसके साथ ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिलाने की बेहतर व्यवस्था कराने के साथ ही कई मैचों के लिए ट्रायल कराए। क्रिकेट के उत्थान का उनका सपना झांसी तक ही सीमित नहीं रहा।
इसके बाद उन्हें यूपी क्रिकेट एसोसिएशन को संभालने का मौका मिला। यहां वे ट्रेजरार, मैनेजर से लेकर निदेशक के पद पर पहुंचे। निदेशक के तौर पर उन्होंने रणजी समेत तमाम टूर्नामेंट का आयोजन कराया। इसके अलावा बीसीसीआई के कई मैचों के ऑब्जर्वर भी रहे। जेडीसीए के सचिव अरविंद कपूर ने बताया कि सोमवार को मदन मोहन मिश्रा जी अपने रुटीन चेकअप के लिए निर्मल अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान अचानक घबराहट हुई और उनका आकस्मिक निधन हो गया। परिवार में उनकी पत्नी विद्या मिश्रा, पुत्र व्यवसायी सलिल मिश्रा, सचिन मिश्रा हैं। जबकि एक पुत्र आनंद मोहन मिश्रा का कुछ समय पहले निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही उनके सिविल लाइंस स्थित आवास पर महानगर के तमाम लोग शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। शाम पांच बजे महानगर के श्याम चोपड़ा मुक्तिधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
कई संस्थाओं की स्थापना की, किताबें भी लिखीं
मदन मोहन मिश्रा ने क्रिकेट संघ के साथ ही कई अन्य संस्थाओं की भी स्थापना की। वे रोटरी क्लब के संस्थापक सदस्य रहे। उनकी रुचि साहित्य और कविता लेखन में भी थी। उन्होंने आचमन किताब भी लिखी। इसके साथ ही कई कविताओं का भी सृजन किया।
अधूरा रह गया स्टेडियम का सपना
यूपी में क्रिकेट को फलक तक पहुंचाने वाले मदन मोहन मिश्रा झांसी में एक क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने हर जगह पहल की। प्रदेश से लेकर केंद्र सरकार तक मांग की, मगर कुछ नहीं हुआ। उनका यह सपना अधूरा रह गया।