झांसी। तहसील में कार्यरत लेखपाल तहसील भवन में काम करने की जगह शिवाजी नगर में निजी भवनों को किराए पर लेकर कार्यालय संचालित कर रहे हैं। जबकि तहसील में आवेदकों की काफी भीड़ जमा रहती है। तहसील में नहीं मिलने की स्थिति में आवेदकों और फरियादियों को लेखपालों के निजी भवनों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इसकी जानकारी तहसील के अधिकारियों को भी है। इसके बाद सभी मौन धारण किए हैं।
जमीन की पैमाइश, आय, जाति, मूल निवास, खसरा, खतौनी, कई तरह की पेंशनों का सत्यापन, सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का सत्यापन सहित कई प्रकार के कार्य राजस्व लेखपालों द्वारा ही किया जाता है। लेखपालों की रिपोर्ट लगने के बाद ही सत्यापन को वैध माना जाता है। वर्तमान में सदर तहसील में क्षेत्रों की संख्या 71 है। जिसमें 54 राजस्व लेखपालों को नियुक्त किया गया है। लेखपालों को कार्य करने के लिए तहसील में कमरा नंबर 24 को आवंटित किया गया है। लेकिन लेखपालों की मनमानी का आलम यह है कि सुबह से लेकर शाम तक लेखपालों का कमरा खाली पड़ा रहता है। जबकि तहसील में आवेदकों का जमावड़ा लगा रहता है। तहसील के कर्मचारियों से पूछने पर लेखपालों का मोबाइल नंबर दिया जाता है। मोबाइल पर संपर्क करने पर आवेदक और फरियादियों को शिवाजी नगर स्थित निजी कार्यालय पर बुलाया जाता है।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी राम अक्षयवर चौहान ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। छापेमारी अभियान चलाकर लेखपालों पर कार्रवाई की जाएगी।
कई लेखपालों ने काम के लिए प्राइवेट कर्मचारियों को काम पर लगा लिया है। जो बिचौलियों की भूमिका अदा करते हैं। काम के एवज में लेनदेन इन्हीं के माध्यम से किया जाता है। लेनदेन होने के बाद ही लेखपालों द्वारा रिपोर्ट लगाई जाती है।