टीकमगढ़ के देहात थाना के मवई गांव निवासी भूपेंद्र (21) पुत्र नंदकिशोर अपने पिता के साथ गल्ले की दुकान चलाता था। पत्नी गीता पांच मई को अपना पेपर देने मायके धरमपुरा चली गई। भूपेंद्र ही उसे मायके छोड़कर आया लेकिन, पत्नी के जाने से वह दुखी था। वह गीता को जाने नहीं देना चाहता था।
रात में भूपेंद्र ने गीता को वीडियो कॉल लगाया और उसके सामने ही फांसी लगा ली। यह देखकर गीता डर गई। उसने तुरंत अपने सुसर नंदकिशोर को फोन करके इस बाते में बताया। यह सुनकर नंदकिशोर के भी होश उड़ गए। वह परिजनों के साथ भागकर भूपेंद्र के कमरे में पहुंचे, तब दरवाजा खुला हुआ था और भूपेंद्र फंदे से लटक रहा था।
उन लोगों ने भूपेंद्र को तुंरत फंदे से नीचे उतारा। उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उसकी नाजुक हालत देखकर डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर लिया। यहां 13 दिन चले उपचार के बाद उसने बृहस्पतिवार को दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद से परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। परिजनों का कहना है कि दो साल पहले ही भूपेंद्र की शादी की गई थी। वह लोग भूपेंद्र के ऊपरी बाधा के फेर में फंसकर जादू-टोना में चक्कर में भी पड़े थे।