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सरकारी दफ्तरों में ही टूट रहे नियम.. याद रखिए कोरोना कहीं गया नहीं है...रफ्तार मंद पड़ी है

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झांसी। कोरोना काल में अपना झांसी शहर काफी बुरे दौर से गुजरा है, एक दिन में यहां 1000-1200 तक मरीज मिले, कइयों की मौत भी हो गई, अब जब कोरोना थोड़ा थमा है तो लापरवाही फिर से शुरू हो गई है। भीड़भाड़ वाले कलक्ट्रेट जैसे बड़े कार्यालयों में भी न तो अब कोविड हेल्प डेस्क दिख रही है न ही गेट पर आने-जाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है। लोग बिना सैनिटाइजेशन के आराम से आ-जा रहे। महिला थाने का भी यही हाल है। जिला अस्पताल में कोविड जांच तो की जा रही है लेकिन अस्पताल आने-जाने वाले हर व्यक्ति को पहले की तरह सैनिटाइज नहीं किया जा रहा न ही स्क्रीनिंग हो रही। कार्यालय कोई भी हो, सोशल डिस्टेंसिग तो पूरी खत्म हो गई है। कुछ जगह तो आगे-आगे सब साफ-सुथरा दिख रहा लेकिन अंदर कूड़ा-कचरा फैला है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि कोरोना का डटकर मुकाबला करने वाले अफसर और कर्मचारी अभी बेपरवाह न हों, कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को कमिश्नरी, जिला उद्योग कार्यालय, महिला थाना, कलक्ट्रेट, जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल का हाल देखा, जहां कोरोना संक्रमण के मामले कम होते ही कुछ ऐसी तस्वीर सामने आई...।
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कमिश्नरी तो चकाचक है, जिला उद्योग विभाग में काम कर रही हेल्प डेस्क
सुबह 11.30 बजे, कमिश्नर कार्यालय चकाचक साफ दिखा। हर तरफ सफाई दिख रही थी। सफाई कर्मचारी में भी अपनी-अपनी जगह लगे थे। देखकर लगा कि हाल ही में पूरे कार्यालय की पुताई की गई है। गेट के भीतर घुसते ही ऊबड़-खाबड़ पड़ी जमीन को समतल किया जा रहा था। इसी दौरान कोई गेट पर कूड़े से भरी पॉलिथीन फेंक गया, कुछ गाड़ियां निकलने से कूड़ा गेट पर फैल गया तो कर्मचारियों ने उसे साफ कराया। बाहर से आने वाले लोग अपने साथ सैनिटाइजर लेकर आए थे। उधर, जिला उद्योग कार्यालय में कोविड हेल्प डेस्क में थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइज किए जाने की व्यवस्था बेहतर थी। यहां मौजूद महिला-पुरुष कर्मी ड्यूटी पर लोगों की स्क्रीनिंग करते दिखे। उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड अभी खत्म नहीं हुआ है इसलिए सख्ती बरती जा रही है।
महिला थाना : महिला बंदी गृह में रखा कबाड़, हॉस्टल के पास फैला कूड़ा-कचरा
दोपहर 12.15 बजे के करीब महिला थाने में अपनी शिकायत लिखाने वाली महिलाएं आ जा रही थीं, यहां महिला हेल्प डेस्क रूम में महिलाओं की शिकायत दर्ज की जा रही थी लेकिन बाहर से आने वाले लोगों की न तो कोई थर्मल स्क्रीनिंग हो रही थी न ही सैनिटाइजेशन किया जा रहा था। महिलाएं आकर कुर्सियों पर बैठतीं और शिकायत लिखाकर कुछ देर बाद वापस चली जातीं। थाने के अंदर कमरे में साफ-सफाई तो ठीक थीं लेकिन महिला पुलिसकर्मी और तैनात महिला सिपाहियों में कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखी। इसके अलावा महिला बंदी गृह में तमाम बैनर और कबाड़ भरा दिखा जबकि किसी केस के सिलसिले में बाहर से लाई गई एक युवती को अंदर उसी कमरे में ही बैठाया गया था जहां बाकी महिला पुलिसकर्मी अपना काम कर रहीं थीं। कोरोना संक्रमण के समय ये लापरवाही भारी पड़ सकती है। उधर, थाने में आगे का हिस्सा तो साफ-सुथरा दिखा, लेकिन महिला हॉस्टल के पास पुलिस लाइन ग्राउंड के पीछे कूड़ा-कचरा फैला पड़ा दिखा। कचरा इतना ज्यादा थी कि मानो कई दिन से यहां सफाई हुई ही नहीं।
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कलक्ट्रेट : गेट पर न कोई स्क्रीनिंग न जांच, हेल्प डेस्क मिली खाली
दोपहर 12: 50 बजे के करीब कलक्ट्रेट में काफी लोगों की आवाजाही जारी थी, लेकिन गेट पर न तो कोई थर्मल स्क्रीनिंग हो रही थी न ही किसी को सैनिटाइज किया जा रहा था। गेट पर ही बने कमरे में एक महिलाकर्मी तो तैनात थी लेकिन लोगों को जांच के बाद अंदर भेजने की कोई व्यवस्था कमरे में नहीं दिखी। परिसर में बनी कोविड हेल्प डेस्क खाली पड़ी थी। लोगों के पानी पीने के लिए लगे नल के आसपास पान मसाला की गंदगी पड़ी दिखी।
अंदर कार्यालयों के सामने पड़ा कूड़ा-कचरा
कलक्ट्रेट में गेट के आसपास सामने के कार्यालयों में अंदर और बाहर तो काफी साफ-सफाई थी लेकिन पीछे की तरफ उप्र राज्य कर्मचारी कल्याण परिषद और जिला प्रोबेशन अधिकारी एवं महिला कल्याण विभाग के सामने कूड़ेदान में कचरे का ढेर लगा था। वहीं, न्यायालय चकबंदी अधिकारी कक्ष के बाहर बरामदे में काफी कूड़ा कचरा और कूड़ा गाड़ी खड़ी दिखी।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी के सामने ही जला रहे संक्रमित कूड़ा
दोपहर 1.30 बजे जिला अस्पताल में अच्छी साफ-सफाई और व्यवस्था दिखी। अधिकांश वार्ड मरीजों से खाली और साफ पड़े थे लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग यहां भी नहीं थी। सुबह यहां कोविड जांच भी की गई थी लेकिन तकरीबन पौने दो बजे के बाद प्राइवेट वार्ड के बाहर जहां लोगों के पानी पीने की व्यवस्था की गई वहां झूठा खाना और गंदगी फेंकी गई थी। उधर, जब अस्पताल की ओपीडी में दिखाने वालों की भीड़ बिल्कुल खत्म हो गई उसके पास कोविड जांच और मरहम पट्टी सहित कूड़ेदानों में भरा कूड़ा अस्पताल के मुख्य गेट के भीतर इमरजेंसी के सामने आग लगाकर जला दिया गया, कूड़े से उठती लपटें और धुआं देख लोग मास्क और मुंह में कपड़ा लगाकर खड़े हो गए। लोगों ने कहा कि अस्पताल का संक्रमित कूड़ा इमरजेंसी के सामने जलाना गलत है इसके धुएं से लोगों को खतरा पैदा हो सकता है। उधर, जिला महिला चिकित्सालय के जच्चा-बच्चा वार्ड में जहां कई बेड खाली थे वहीं जिन वार्डों में महिलाएं अपने नवजात शिशु के साथ लेटी थीं वहां तीमारदारों की भीड़ थी। उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग बताकर रोका नहीं जा रहा।
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