झांसी। किसी आम आदमी के यहां डेंगू का लार्वा मिला नहीं कि मलेरिया विभाग तुरंत नोटिस थमा देता है। लेकिन, शनिवार को जब कलक्ट्रेट में डेंगू का लार्वा मिला तो मलेरिया विभाग चुप्पी साध गया। वहां लार्वी साइट का छिड़काव कर लार्वा को तो मार दिया गया लेकिन धारा-188 के तहत नोटिस देने में विभाग के हाथ कांप रहे हैं। जबकि, 1655 घरों को इस साल लार्वा मिलने पर नोटिस दिया जा चुका है।
कलक्ट्रेट परिसर में प्रशासन के बड़े अफसरों के ऑफिस हैं। यहां पर रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन रहता है। शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट से एसडीएम कोर्ट जाने वाले रास्ते में जलजमाव होने के कारण यहां पर डेंगू का लार्वा पनप रहा था। कुछ मच्छर भी थे। यह स्थान डीएम के ऑफिस से चंद कदम दूर है। मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लार्वी साइट का छिड़काव करके लार्वा को तो मार दिया मगर कलक्ट्रेट के किसी भी अधिकारी को नोटिस जारी नहीं किया। जबकि, जिले में 1655 भवन स्वामियों को लार्वा मिलने पर नोटिस दिया जा चुका है। चूंकि, ये सब आम जनता थे, तो नियमों का पाठ पढ़ाने में स्वास्थ्य विभाग ने तनिक भी देरी नहीं की। लेकिन, जब साहबों को नोटिस देने की बात आई तो स्वास्थ्य विभाग के हाथ कांप गए। इससे तो स्वास्थ्य विभाग यही संदेश दे रहा है कि अफसर चाहें जितनी मनमानी करें, उन पर नियम-कानून लागू नहीं होते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को जिन कार्यालय के बाहर लार्वा पाया गया है, उसे नोटिस देंगे।
तुरंत नोटिस देने का है नियम
जानकारों के मुताबिक डेंगू का लार्वा जहां मिलता है तो वहां लार्वी साइट का छिड़काव करने के साथ-साथ तुरंत आईपीसी की धारा-188 के तहत नोटिस देने का नियम है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
क्या है आईपीसी की धारा 188
आईपीसी की धारा 188 यह कहती है कि यदि कोई नागरिक सरकार के ऐसे आदेश का उल्लंघन करता है, जिससे मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा आदि को खतरा होता है तो ऐसे नागरिक को छह महीने की जेल या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों की ही सजा दी जा सकती है। प्रणय श्रीवास्तव, पूर्व महामंत्री, जिला अधिवक्ता संघ।