झांसी। बीएएमएस छात्रों के नंबर बढ़ाने वाले हैश टैग प्रकरण में रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं। अब पता चला है कि 50-50 हजार रुपये में बीएएमएस छात्रों को पास करने के लिए सौदा किया गया। बीयू प्रशासन से की गई गोपनीय शिकायत में भी इसका जिक्र है। कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इसी शिकायत के बाद बीयू हैश टैग प्रकरण का पर्दाफाश करने में कामयाब हुआ है।
बुंदेलखंड के आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नंबर बढ़ाने के बड़े खेल का खुलासा होने से हड़कंप मचा हुआ है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा कराई जांच में सामने आया है कि बीएएमएस के 500 छात्र-छात्राओं ने अपनी कॉपियों के पहले पन्ने पर हैश टैग का चिह्न बनाया है। बीयू अधिकारियों का भी कहना है कि प्रथम दृष्टया ही ये स्पष्ट हो गया है कि ये चिह्न नंबर बढ़ाने के लिए किया गया। इन छात्रों की कॉपियों में भी दूसरे विद्यार्थियों की तुलना में औसत से ज्यादा अंक दिए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि बीयू प्रशासन के पास पहुंची गोपनीय शिकायत में शिकायतकर्ता ने एक कॉलेज का नाम लेते हुए बताया है कि बीएएमएस की परीक्षाओं में अच्छे नंबरों से पास करने के एवज में हर विद्यार्थी से 50-50 हजार रुपये लिए गए। साथ ही कॉपी में विशेष चिह्न बनाने के लिए भी कहा गया। शिकायत में दम भी इसलिए लग रहा है, क्योंकि ये जानकारी बीयू अधिकारियों को परीक्षा से पहले दी गई। शिकायतकर्ता के अनुरोध पर ही बीयू प्रशासन ने जब मामले की जांच कराई तो 3200 उत्तर पुस्तिकाओं में 15 फीसदी कॉपियों में एक सा चिह्न मिला।
कल गठित होगी जांच समिति
हैश टैग प्रकरण की जांच के लिए विश्वविद्यालय सोमवार को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करेगा। कमेटी में ऐसे लोगों को रखा जाएगा, जो किसी के दबाव में न आएं। इसके लिए सदस्यों का पुराना रिकॉर्ड भी पता किया जा रहा है। कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।