झांसी। कोरोना काल में पहले लॉकडाउन और फिर टीकाकरण बंद होने की वजह से शून्य से दो साल तक के 4900 बच्चों का रुटीन टीकाकरण का चक्र टूट गया। सर्विलांस अभियान में ये बात सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी का टीकाकरण शुरू करा दिया है।
बच्चों को अलग-अलग महीने में छह बार बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है। जिन बीमारियों के टीके बच्चों को नहीं लग पाते हैं, उन बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। सात से 16 सितंबर तक स्वास्थ्य विभाग का सर्विलांस अभियान चला। अभियान के दौरान आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीमों ने 3.71 लाख से ज्यादा घरों का डोर-टू-डोर सर्वे किया। सर्वे में शून्य से दो साल तक के 4900 बच्चों का रुटीन टीकाकरण प्रभावित होना पाया गया। किसी का डेढ़ महीने तो किसी का साल भर वाला टीकाकरण का चक्र टूट गया। सर्विलांस अभियान में ये बात सामने आने के बाद अब इनका टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रविशंकर ने बताया कि लगभग 1700 बच्चों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बाकियों को भी जल्द टीके लग जाएंगे। तेजी से टीकाकरण का काम चल रहा है।
1907 गर्भवतियों को समय पर नहीं लगा टिटनेस इंजेक्शन
कोरोना काल में बच्चे ही नहीं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। बताया गया कि गर्भवतियों को दो बार टिटनेस का इंजेक्शन लगाया जाता है। सर्विलांस अभियान में सामने आया कि 1907 गर्भवतियों को समय पर टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लग सका। इनमें से एक हजार महिलाओं का टीकाकरण अब कर दिया गया है।
83 हजार को नहीं लगी थी कोविड की पहली डोज
कोरोना के चलते एक तरफ बच्चों, गर्भवतियों का रुटीन टीकाकरण जहां प्रभावित हुआ। वहीं, 45 साल से अधिक आयु के 83 हजार से ज्यादा लोगों ने कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवाई। सर्वे में ये बात सामने आने पर अब स्वास्थ्य विभाग ने 21 हजार से अधिक को पहली डोज लगा दी है।
समय पर टीका नहीं तो बच्चों को ये बीमारी हो सकती
- टीबी
- डिप्थीरिया
- टिटनेस
- हेपेटाइटिस
- डायरिया
कब-कौन सा टीका लगता
जन्म के 24 घंटे में: बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओरल पोलिया वैक्सीन (ओपीवी-0)
छह हफ्ते पर: डीपीटी-1, इनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी-1), ओपीवी-1, रोआवायरस-1, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी-1)
दस हफ्तों पर: डीपीटी-2, ओपीवी-2, रोटावायरस-2
14 हफ्तों पर: डीपीटी-3, ओपीसी-3, रोटावायरस-3, आईपीवी-2, पीसीवी-2
9 से 12 महीनों पर: खसरा और रूबेला-1
16 से 24 महीनों पर: खसरा-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर