झांसी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में एक अहम फैसला देते हुए कहा है कि सांसदों - विधायकों पर दर्ज मुकदमे बगैर हाईकोर्ट की मंजूरी के वापस नहीं लिए जा सकेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की शक्तियों को समाप्त कर दिया है। न्यायालय के इस रुख से झांसी में भी कई ‘माननीयों’ के इरादों पर पानी फिर गया है। यहां वर्तमान विधायकों के अलावा पूर्व विधायकों, पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री तक पर 20 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जो एमपी एमएलए कोर्ट में विचाराधीन हैं।
सांसद, विधायकों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की राज्यों की मंशा पर देश की सर्वोच्च अदालत ने पानी फेर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बगैर हाईकोर्ट की मंजूरी के मुकदमे वापस नहीं लिए जा सकेंगे। झांसी में भी नौ जनप्रतिनिधियों पर 20 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश /एमपी एमएलए कोर्ट में जारी है। इनमें पूर्व केंद्रीय प्रदीप जैन आदित्य पर एक, प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा पर एक, पूर्व सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव पर छह, सदर विधायक रवि शर्मा पर एक, गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत पर दो, पूर्व गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव पर दो, पूर्व गरौठा विधायक बृजेंद्र व्यास पर तीन, मऊरानीपुर के पूर्व विधायक प्रागीलाल पर दो तथा पूर्व विधान परिषद सदस्य श्यामसुंदर सिंह यादव पर दो मुकदमे दर्ज हैं।
वर्तमान व पूर्व सांसदों - विधायकों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों की सुनवाई एमपी, एमएलए स्पेशल कोर्ट में जारी है। कोर्ट में वर्तमान में 16 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें से दो मुकदमों में से एक में दो जनप्रतिनिधि और दूसरे में तीन आरोपी हैं।
- देवेश श्रीवास्तव, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता