शहर में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है। खुले में कचरा जलाने पर रोक के बावजूद कूड़ा जलाया जा रहा है। यह स्थिति तब है जबकि कूड़ा जलाने पर संबंधित व्यक्ति पर पांच से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाने का प्रावधान है।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में रोजाना 97 टन कचरा निकलता है। शहर में साफ-सफाई और कचरा उठाने के लिए 662 सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है। कूड़ा उठाने के लिए 39 वार्डों में मात्र 250 हाथ ठेले लगाए गए हैं। इन ठेलों के माध्यम से सफाई कर्मी कूड़ा उठाने का कार्य करते हैं। सफाई कर्मी कूड़ा मोहल्ले के बाहर प्रमुख सड़क पर ही रख देते हैं। यहां से कूड़ा उठवाकर कांशीराम सामुदायिक भवन के पीछे व अन्य स्थानों पर बने कूड़ा डंपिंग स्थल पर ले जाया जाता है। उधर, लंबे समय से विभिन्न स्थानों पर पड़े कूड़े का उठान ही नहीं हो रहा है। इससे निकलने वाले दुर्गंध से उधर से गुजरने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह नगर के तारापुर कालोनी, नईगंज, सहकारी कालोनी पश्चिमी में जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। इससे परेशान लोग अक्सर कूड़े जला दे रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्रा का कहना है कि कूड़ा जलाना कानूनी अपराध है। चाहे सफाई कर्मचारी हों अथवा शहरवासी, कोई भी कूड़ा जलाते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।