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एसटीपी का कार्य गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को हैंडओवर

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शहर के गंदे पानी को शोधित करने के लिए पंचहटिया में बन रहे एसटीपी का कार्य अब वाराणसी की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कराएगी। पहले इसका निर्माण जलनिगम करा रहा था। लेकिन इसके दो भागों में बंटने के कारण अब इसके निर्माण की जिम्मेदारी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को दी गई है। जल निगम की ओर से तीन दिन पहले शनिवार को एसटीपी के शेष अब बचे कार्र्यों को कराने के लिए जल निगम ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को हैंडओवर कर दिया है।
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सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 28 एमएलडी गंदा पानी निकालता है, जो विभिन्न नालियों और नालों से होकर आदि गंगा गोमती नदी में गिरता है, जिससे गोमती नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी गोमती नदी में नहीं गिरे और उसे शोधित कर दूसरे उपयोग में लाया जा सके, इसके लिए नमामि गंगे योजना के तहत 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और चार पंपिंग स्टेशन बनाने और 6.9किमी.सीवर पाइप डालने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए 206.05 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की गई है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 2019 में शुरू किया गया, जिसे इसी माह में पूरा करने का समय निर्धारित किया गया था। लेकिन कोरोना के कारण इसके निर्माण का समय बढ़ाकर दिसंबर कर दिया गया । एसटीपी का निर्माण करने की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है। उसक ीओर से 90 फीसदी एसटीपी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। वहीं बलुआ घाट, शेषपुर, हनुमान घाट और निर्माणाधीन एसटीपी परिसर में बनने वाले पंपिंग स्टेशन का भी निर्माण कार्य भी 60 फीसदी पूरा हो गया है। वहीं 3.5 किमी. सीवर पाइप भी डाल दी गई है। लेकिन हाल ही में सरकार ने जल निगम को दो भागों जल निगम शहर और जल निगम ग्रामीण में बांट दिया है। जिससे अब एसटीपी के शेष बचे निर्माण कार्य को कराने की जिम्मेदारी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को मिल गई है। पहले निर्माण कार्य करा रही कार्यदायी संस्था जल निगम शनिवार को उसटीपी के शेष कार्यों को परवान चढ़ाने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को हैंडओवर कर दी है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एके गुप्ता का कहना है कि बीते शनिवार को एसटीपी के शेष बचे कार्यों को कराने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को हैंडओवर कर दिया गया है। अब उसके ओर से एसटीपी के शेष बचे कार्यों को कराने का कार्य किया जाएगा, लेकिन अमृत योजना के तहत शहर में सीवर लाइन डालने का कार्य अभी जल निगम शहरी ही करेगा।
14 बड़े नालों से होकर गोमती में गिरता है शहर का गंदा पानी
जौनपुर। शहर से निकलने वाला गंदा पानी 14 नालों से होते हुए गोमती नदी में गिरता है, जिसमें हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य नाला है, जिनका पानी एसटीपी का निर्माण होने जाने के बाद उसमें जाएगा, जिसे शोधित कर खेतों की सिंचाई सहित अन्य उपयोग में लाया जाएगा।
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