पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद की बैठक में हुए बवाल के बाद विवि के दो अधिकारी आमने-सामने हो गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बाद मामला पत्रचार तक पहुंच गया है। एक अधिकारी दूसरे पर सरकारी कार्यों में बाधा डालने का तक आरोप लगा रहे हैं। कार्यपरिषद की बैठक के बाद मामला तूल पकड़ लिया है। हालत यहां तक पहुंच गई कि है कि अधिकारी राजभवन को चिट्ठी भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
कुलसचिव महेंद्र कुमार ने वित्त अधिकारी को जारी पत्र में कहा कि वित्त विभाग से देयकों का समय पर भुगतान नहीं हो पाने के कारण इसकी शिकायत जनसूचना, जन सुनवाई शासन और राजभवन में भेजी जा रही है। जिससे कारण विवि प्रशासन के सामने विषम परिस्थिति उत्पन्न हो रही है। कुलसचिव और कुलपति को आख्या भेजने में कठिनाई हो रही हैं। शासन और राजभवन द्वारा दोनों को अनुशासनात्मक की चेतावनी दी जा रही है। वित्त विभाग से मूल्यांकन बिलों के भुगतान, कर्मचारियों के देयकों, शिक्षकों के देयकों, एकेटीयू, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं विभिन्न प्रकार के देयकों का समय से निस्तारण नहीं हो रहा है। ऐसा नहीं होने के कारण विवि में कार्यरत विभिन्न संवर्गो कार्मिकों में आक्रोश है। जिसके चलते विवि का छवि खराब हो रही है। वित्त अधिकारी वित्तीय कार्यो से हटकर प्रशासनिक कार्यो में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप की चेष्टा की जाती है। जो किसी भी व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। इससे प्रशासनिक कार्यो में अतिक्रमण होता है। वित्त अधिकारी को जारी पत्र में वित्तीय दायित्यों पर ध्यान की बात कही है। बता दें कि विवि में 25 अक्तूबर को कार्यपरिषद की बैठक में किसी मुद्दे को लेकर सदस्यों ने हद की सारी सीमाएं लांघ दिया था। जिसके बाद से विवि. के तीन बडे़ अधिकारी आमने सामने हो गए हैं। एक-दूसरे की शिकायत राजभवन और शासन से करने की तैयारी में हैं।
इस संबंध में पूछे जाने वित्त अधिकारी संजय राय ने कहा कि अनावश्यक रूप से किसी भी मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया है। केवल वित्तीय नियमों का अनुपालन करने की अपेक्षा की गई है। लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संबंधित वित्तीय नियमों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। पूर्व में कुलसचिव कार्यालय से वित्तीय नियमों का अनुपालन करने की अपेक्षा की गई थी। वित्त अधिकारी को विवि अधिनियम तथा विश्वविद्यालय की परिनिमावली में परामर्श देने का अधिकार प्राप्त है। कतिपय मामलों में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से शासन और राजभवन को पूर्व में ही अवगत करा दिया गया है।