जौनपुर में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट
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घटना के बाद एक घंटे तक मकान से धमाके की आवाज आती रही। मौके पर पहुंचे फायर बिग्रेड के जवान घंटें मशक्कत कर आग बुझाने में लगे रहे। रात सात बजे तक मकान के मलबे को हटाने का काम जारी रहा। वहीं, घटना की सूचना पाकर मौके पर एडीएम राम प्रकाश,उप जिलाधिकारी अर्चना ओझा, क्षेत्राधिकारी एसपी उपाध्याय, प्रभारी निरीक्षक अशेष नाथ सिंह, तहसीलदार अमित त्रिपाठी समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।
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आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा अमर उजाला ने 28 अक्तूबर को ही जता दिया था। लेकिन इसके बाद भी ध्यान न देने का नतीजा ये हुआ कि घनी आबादी में अवैध तरीके से बन रहे पटाखा बनाने की फैक्ट्री में शनिवार को विस्फोट हो गया। इस घटना में दो मासूम सहित पांच लोग झुलस गए।
पटाखा कारोबार की लापरवाहियों और अनदेखी को लेकर अमर उजाला ने अवैध पटाखा कारोबार ने तेरह वर्षों में ली 18 लोगों की जान, आधी थी कार्रवाई, पूरी करने की याद अब आई... शीर्षक से सिलसिलेवार खबरें प्रमुखता के साथ प्रकाशित की थी। इसके बाद भी प्रशासन ने इस ओर थोड़ी भी गंभीरता नहीं दिखाई।
नगर के कटघरा, चहारसू चौराहा, शाहगंज पड़ाव सहित विभिन्न मोहल्लों व तहसील तथा ग्रामीण कस्बों में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण व बिक्री थोक और फुटकर व्यवसाइयों द्वारा किया जाता है। सुरक्षा को दरकिनार कर चल रहे इस धंधे से कभी भी बड़ी घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है।
जनपद में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों के स्तर से इसे लेकर उदासीनता बरती जाती है। देखा जाए तो नगर सहित जिले की कई मोहल्ले बारूद के ढेर पर हैं। कुछ लोग घनी आबादी में छुपे तौर पर पटाखों को बनाने और उन्हें बेचने का काम करते हैं। वहीं, प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है। दीपावली नजदीक आते ही इस खेल की गति तेज हो जाती है, जैसा कि इस बार भी देखने को मिला।