उरई। बुधवार यानी पहली सितबंर से जिले भर की प्राइमरी पाठशालाएं (कक्षा एक से पांच) भी खुलेंगी। करीब पांच महीने बाद परिषदीय विद्यालय बच्चों की चहचहाट से गूंजेंगे। पर जिले के कुछ ऐसे विद्यालय भी हैं जहां एक सितंबर को भी सन्नाटा टूटने का नाम नहीं लेगा। ऐसे विद्यालय बाढ़ प्रभावित इलाकों में है, जहां पानी तो खत्म हो गया है लेकिन कीचड़ और दलदल बरकरार है। सीएम के आदेशों को भी अधिकारियों ने अनसुना कर दिया। बाढ़ प्रभावित इलाकों वाले विद्यालयों के कमरों में या तो कीचड़ भरा या फिर रास्ते भी चलने लायक नहीं है। अब जब विद्यालय खुलने में मात्र कुछ ही घंटे बचे हैं तो सफाई कार्य किया जा रहा है। प्रस्तुत है, ऐसे विद्यालयों पर आधारित एक रिपोर्ट-
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फोटो-15 बाढ़ के वक्त डूबा बिलौड़ का विद्यालय (फाइल फोटो)
फोटो-14 विद्यालय की कक्षाओं में जमा कीचड़
फोटो-08 कीचड़ की मोटी परतें निकालने में जुटा मजदूर।
कीचड़ की मोटी परतें, कैसे हो तैयारी पूरी
रामपुरा। नदिया के पास स्थित बिलौड़ गांव का प्राइमरी विद्यालय बाढ़ के पानी से छत तक डूब गया था। जैसे तैसे पानी खत्म हुआ पर बाढ़ के जख्म अभी भी साफ दिखाई दे रहे हैं। विद्यालय का शायद ही कोई ऐसा कमरा हो जिसमें सूखे कीचड़ की करीब तीन से चार फुट की मोटी मोटी परतें न जमी हो। पूरे विद्यालय में संड़ाध सी फैली हुई है। अध्यापक सुबोध ओझा ने बताया कि सारे दस्तावेज, हाजिरी रजिस्टर यहां तक की फर्नीचर सब कुछ बाढ़ के पानी के कारण गल गया है। हैंडपंप का सबमर्सिबल भी खराब है। विद्यालय के दरवाजे पर अभी भी जलभराव और कीचड़ है। भीतर तक बच्चे क्या शिक्षक कोई नहीं पहुंच पाएगा। विद्यालय में कुल 39 बच्चे पंजीकृत है, दो शिक्षक और एक शिक्षा मित्र भी है, कल से पढ़ाई होनी है, कैसे कह दे कि तैयारी पूरी है। (संवाद)
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रास्तों में जलभराव, दीवारों पर भी दरारें
कदौरा, मुहम्दाबाद। बाढ़ नहीं तो बारिश भी कम मुसीबत भरी नहीं रही है। उस पर रही सही कसर अधिकारियों की लापरवाही ने पूरी कर दी है। हालात यह है कि स्कूलों की दीवारें जर्जर हो गई है। कक्षाओं में धूल गंदी जमा है। बाउंड्री टूटी है तो भीतर गोबर के ढेर भी लगे हैं। ऐसे में बच्चों का पढ़ना और शिक्षकों का पढ़ाना दोनों ही दूभर होगा। कदौरा प्रतिनिधि के अनुसार बम्हौरी स्थित प्राइमरी विद्यालय के एकल कक्ष की दीवारों पर दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। सालों से यहां मरम्मत का काम नहीं हुआ है। जिस कारण दीवार कभी गिर सकती है। इसी तरह कस्बे के प्राइमरी स्कूल के सामने जलभराव व कीचड़ व्याप्त है। जिससे होकर ही बच्चों को कक्षाओं तक पहुंचना पड़ेगा। जिम्मेदारों की ओर से इसे ठीक कराने का कोई काम अभी तक नहीं हुआ है। डकोर ब्लाक में जरूर सैनिटाइजर का काम दिखा। (संवाद)
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बोले अभिभावक
फोटो-16 रमन
कदौरा के अभिभावक रमन चौधरी का कहना है कि स्कूल खोलने से पहले ही उसकी साफ सफाई व मरम्मत करानी चाहिए, अब तो बच्चों को भेजने से पहले सोचना पड़ेगा।
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फोटो-17 ममता
बिलौड़ गांव की ममता के मुताबिक बाढ़ ने सबकुछ तो छीन लिया। बच्चों की पढ़ाई ही बची थी, वह भी चौपट हो जाएगी। स्कूलों का तो बुरा हाल है, कहां और कैसे भेजे बच्चों को ।
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बोले जिम्मेदार......
फोटो-18 बीएसए प्रेमचंद्र
बाढ़ प्रभावित इलाकों में वाकई विद्यालय संचालन में दिक्कतें आएंगी, क्योकि वहां हालात अबी सामान्य नहीं है। इसलिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं, जहां पर भी विद्यालय की दशा फिलहाल ठीक न हो। वहां पर किसी दूसरे विद्यालय या सुरक्षित स्थान पर मोहल्ला क्लासें चलाए। जल्द ही विद्यालयों की दशा सुधारी जाएगी।
बीएसए, प्रेमचंद्र यादव