कालपी। दोपहर में डूबे युवकों की तलाश देर रात तक चलती रही। एसडीआरएफ की टीम नाव से युवकों को तलाश रही है तो पुलिस की देखरेख में गोताखोरों की टीम भी जुटीं है। एसडीएम और सीओ भी मौके पर डटे रहे। मंदिर के आसपास एकत्र भीड़ के हर चेहरे पर अनहोनी की आशंका का खौफ दिखाई दे रहा था।
बताते चलें कि शानिवार की दोपहर बाढ़ देखने गए 6 युवकों की नाव व्यास मंदिर के पास यमुना नदी में पलट गई। जिसमें दो युवक तो किसी तरह बच निकले पर चार डूब गए। डूबने वालों में तीन उरई और एक कालपी का युवक है। सभी डूबे युवकों के घरों में कोहराम सा मचा रहा। नाते रिश्तेदारों की भीड़ लगी रही। उरई में मौजूद लोग मोबाइल से कालपी की पल पल की खबर ले रहे थे।
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अब राहत सामग्री प्रशासन बांटेगा
कालपी। कालपी में चार युवकों के डूबने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने देर रात आदेश जारी किया कि कालपी समेत बाढ़ प्रभावित रामपुरा, कुठौंद आदि क्षेत्रों में कोई भी सामाजिक संगठन बिना अनुमति बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देने नहीं जाएगा। इसके लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। साथ ही राहत कार्य में शामिल लोगों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। फिलहाल राहत कार्य की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने ले रखी है।
कालपी हादसे की सूचना पाकर देर रात तक भाजपा और सपा के वरिष्ठ नेता भी घटनास्थल पर पहुंचते रहे। बताते चलें कि जिले में बीते चार दिनों से रामपुरा, कुठौंद, कालपी में बाढ़ की स्थिति है। शनिवार की सुबह से जब बाढ़ का जलस्तर थमने लगा तो कई सामाजिक संगठन राहत सामग्री लेकर बाढ़ पीड़ितों को देने पहुंच गए। बताया जा रहा है कि कालपी में जिन युवकों की नाव डूबी, उस नाव पर भी राहत सामग्री रखी थी। इस जानकारी के बाद ही जिला प्रशासन ने सामाजिक संगठनों की ओर से राहत सामग्री बांटने पर रोक लगाने का फैसला लिया है।