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जाति धर्म के समीकरण बनाकर कर गए नैया पार

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इस बार जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में मुद्दों की जगह जाति, धर्म के समीकरणों के सहारे प्रत्याशियों की नैया पार हुई हैं। उरई सदर सीट पर एससी मतदाताओं के सहारे कमल खिला। तो माधौगढ़ में पिछड़ों का साथ और बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी से भाजपा ने भगवा लहरा दिया। वहीं कालपी में ठाकुर वोट के बंटने और निषाद पार्टी के थाली वाले चुनाव चिह्न की वजह से भाजपा निषाद पार्टी गठबंधन ने यह सीट गंवा दी। जबकि एक नए समीकरण ब्राह्मणों और मुस्लिमों की एकजुटता ने पहली बार कालपी में साइकिल दौड़ाई।
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उरई सदर पर सीट पर फिर एक बार भगवा लहराया। सदर विधानसभा के मतदाताओं ने एक बार फिर से भाजपा पर भरोसा जताया। इस सीट पर लगभग डेढ़ लाख मतदाता एससी वर्ग के हैं। 20 फरवरी को 60.10 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट की चोट कर अपने प्रत्याशी को जिताने का ऐलान कर दिया था।
इस सीट पर सपा और भाजपा में सीधा मुकाबला था। भाजपा से गौरीशंकर वर्मा और सपा के प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा कोरी समाज के थे। माना जा रहा था कि एससी वोटरों के बंटवारे से दोनों के बीच कड़ा मुकाबला होगा, पर भाजपा ने बसपा के वोट बैंक कहे जाने वाले एससी वोटरों में सेंधमारी कर सवर्णों के वोट के सहारे नैया पार लगा ली। उधर, कोरोना काल में बंटे राशन ने भी मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने का किया है। यही कारण रहा है कि भाजपा प्रत्याशी ने 37648 वोट से जीत दर्ज कर ली। सपा की इस हार में अंतिम वक्त तक टिकट बदलाव की भी एक नाराजगी रही। वर्ष 2017 में सपा से लड़े महेंद्र सिंह कठेरिया भी इस सीट से लड़ने की दावेदारी की थी। पर टिकट घोषित होने के बाद उन्होंने किनारा कर लिया था। माना जा रहा था कि टिकट के लिए हुई रार से भी नुकसान हुआ है। कठेरिया समाज का लगभग 32 हजार वोट है।
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जिले की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली कालपी में सबसे रोमांचक मुकाबला रहा। यहां शुरुआत से मामला त्रिकोणीय रहा। हर दो-चार राउंडों में सपा, बसपा और भाजपा निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी आगे पीछे होते रहे।
यहां कांग्रेस की उमाकांति और निषाद पार्टी के छोटे सिंह एक ही बिरादरी से थे। वर्ष 2012 में ठाकुर वोटों के सहारे जीतने वाली उमाकांति को वोट न देकर ठाकुरों ने भाजपा गठबंधन को वोट दिया। हालांकि चारों प्रत्याशियों में सपा के विनोद चतुर्वेदी इकलौते ब्राह्मण होने की वजह से ब्राह्मणों का झुकाव सपा की ओर रहा। करीब 40 से 45 हजार ब्राह्मण वोटों वाली विधानसभा सीट को परंपरागत यादव और मुस्लिम वोटों को मिलाकर सपा ने जीत हासिल की। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता लगभग 35 हजार और यादव 30 हजार हैं। हालांकि भाजपा-निषाद पार्टी के वोटों को लेकर अंत में उठाई गई आपत्ति के बाद पेंच जरूर फंसा था पर देर रात जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंका निरंजन ने सपा प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी को जीत का सहरा पहनाया।
कभी बसपा का गढ़ कहलाने वाली माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र पर लगातार दूसरी बार भगवा लहराया है। इस सीट पर इस बार 57.89 फीसदी मतदान हुआ था। मूलचंद्र निरंजन ने लगातार दूसरी बार विजयी होकर रिकार्ड बनाया है।
चुनाव से पहले यहां भाजपा प्रत्याशी के प्रति जनता में काफी नाराजगी की चर्चाएं थी। पर मतदान से तीन दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा होने के बाद हवा का रुख बदल गया। बसपा से पिछड़े समाज की शीतल कुशवाहा, सपा से ठाकुर समाज के राघवेंद्र सिंह और कांग्रेस से ब्राह्मण समाज के सिद्धार्थ दीवौलिया होने के बावजूद इन तीनों समाज के लोगों के वोटों ने भाजपा ने सेंध मारी की। केवल कुशवाहा और एससी वोट ही सवा लाख के आसपास होने के बावजूद बसपा प्रत्याशी की गाड़ी तीस हजार वोटों पर जाकर रुक गई। वहीं ठाकुरों का वोट अधिक होने के बावजूद सपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह इनका पूरा वोट भाजपा में जाने से नहीं रोक सके। वह भी 63 हजार वोट पाकर अटक गए। सपा में ठाकुर वोट कम जाने की वजह पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नये प्रत्याशी को टिकट देना भी एक कारण रहा। उधर, ब्राह्मणों का भाजपा की ओर झुकाव ने भी भाजपा के मूल चंद्र निरंजन को 34974 वोट हासिल हुए।
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