उरई। पुरानी पेंशन बहाली समेत 21 सूत्री मांगों को लेकर शिक्षक कर्मचारियों ने गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर में सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक तक धरना दिया। इस दौरान सरकार पर कर्मचारी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार ने हठधर्मिता नहीं छोड़ी तो शिक्षक कर्मचारी मांगों को लेकर जेल जाने से नहीं डरेंगे।
कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर अधिकार मंच के बैनर तले धरना दिया गया। मंच संयोजक गुलाब सिंह, हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव, डॉ राकेश निरंजन ने कहा कि सरकार ने 2005 के बाद कर्मचारी और शिक्षकों की बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन को समाप्त कर दिया है। नई पेंशन स्कीम में सेवानिवृत्त के बाद मासिक आय की कोई गारंटी नहीं है। कर्मचारी पुरानी पेंशन लेकर रहेंगे। पलक निधि नायक, प्रताप सिंह, रविप्रकाश ने कहा कि राजनाथ सिंह जब सत्ता में नहीं थे तब उन्होंने लिखित आश्वासन दिया था कि भाजपा की सरकार आने पर पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाएगी। पर अब सरकार वादाखिलाफी कर रही है। जनप्रतिनिधियों को तो पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है पर कर्मचारियों के साथ धोखा किया जा रहा है। महेंद्र भाटिया, नरेश निरंजन, लखन अहिरवार, वाजिद हुसैन ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा योजना खटाई में पड़ी है। अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष विद्यासागर मिश्रा ने कहा कि मांगों का समय से निस्तारण न होने से कर्मचारी शिक्षकों में सरकार के प्रति आक्रोश है। यदि सरकार मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं करती है तो 30 नवंबर को लखनऊ में प्रदर्शन होगा। कर्मचारी जेल जाने से नहीं डरते है। संचालन नरेश निरंजन व हरीश राठौर ने संयुक्त रुप से किया। निर्भय सिंह, रेखा जाटव, अनुराग मिश्रा, लालजी पाठक, लोकेंद्र यादव, रामकुमार आदि मौजूद रहे। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित 21 सूत्री ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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फोटो-8-कलेक्ट्रेट में धरनासभा में तख्तियां लिए बच्चे। संवाद
बच्चे बोले, हमारी मांगें पूरी हो
उरई। धरना सभा में शिक्षक कर्मचारियों के छोटे छोटे बच्चे भी पहुंचे। वह कर्मचारियों की मांगों से संबोधित तख्तियां हाथों लिए थे। जिसमें लिखा था हमारी मांगें पूरी हो, चाहे जो मजबूरी हो। बच्चों का इस तरह प्रदर्शन लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।