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गर्मियां शुरू होते ही ट्रेनों में सीटें मिलना बंद

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उरई। गर्मी आते ही ट्रेनों में सीट के लिए मारामारी शुरू हो गई है। हालत यह है कि मई और जून में किसी भी ट्रेन में जगह नहीं है। सबसे ज्यादा मारामारी मुंबई जाने वाली ट्रेनों की है। चाहे दैनिक ट्रेन हो या फिर साप्ताहिक, सभी में सौ से ज्यादा वेटिंग चल रही है। स्लीपर और एसी सभी जगह फुल है।
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मुंबई से लखनऊ जाने वाली पुष्पक ट्रेन में 27 जून तक किसी भी श्रेणी में कोई जगह नहीं है। इसमें 100 से ज्यादा स्लीपर कोच में और 50 से अधिक एसी कोच में वेटिंग आ रही है। मुंबई से गोरखपुर जाने वाली कुशीनगर का भी यही हाल है। इस ट्रेन में भी 18 जून तक कोई जगह नहीं है। इस ट्रेन भी 50 से ज्यादा हर श्रेणी में वेटिंग है। जबकि गोरखपुर से मुंबई जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस में चार जुलाई तक जगह नहीं है।
अहमदाबाद से बनारस और दरभंगा जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस में भी 11 जुलाई तक कोई जगह नहीं है। इसमें स्लीपर में 160 और थर्ड एसी में 40 वेटिंग चल रही है। लोकमान्य तिलक से गोरखपुर जाने वाली संत कबीरनगर एक्सप्रेस में स्लीपर में 75 और थर्ड एसी में 40 वेटिंग आ रही है और यह ट्रेन 26 जून तक फुल है। गोरखपुर से कोच्चिवैली और कोच्चिवैली से गोरखपुर जाने वाली राप्ती सागर एक्सप्रेस में स्लीपर में 190 और थर्ड एसी में 30 वेटिंग चल रही है। इस ट्रेन में भी आठ जुलाई तक वेटिंग है। ग्वालियर से बरौनी और बरौनी से ग्वालियर जाने वाली ट्रेन में 22 जून तक जगह नहीं है। इस ट्रेन में स्लीपर में 100 और एसी में 35 वेटिंग चल रही है। झांसी-कानपुर रेलमार्ग की लाइफ लाइन मानी जाने वाली इंटरसिटी में भी रिजर्वेशन के लिए 20 मई तक वेटिंग चल रही है। सीबीपीएस सीपी सोनकर ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गर्मियों में समर स्पेशल के साथ दैनिक ट्रेनों में भी भीड़ है। रोजाना लगभग तीन सौ टिकट बन रहे हैं।
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जान गंवाने वालों की याद में प्रदर्शन
उरई। वर्ष 1974 में हुई ट्रेड यूनियन की हड़ताल के दौरान नौकरी और जान गंवाने वाले रेल कर्मियों की याद में रविवार की रात रेल कर्मियों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कैंडल मार्च भी निकाला। नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन (एनसीआरएमयू) के शाखा सचिव के के त्रिपाठी ने कहा कि आठ मई 1974 में ट्रेड यूनियन की हड़ताल हुई थी। उसी की याद में यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान विजय कुमार, दीपक, महेंद्र यादव, वेदप्रकाश, रामप्रकाश आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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