राजधानी समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्था, मशीनों व दवाओं की कमी व जांचों की लचर व्यवस्था के आरोपों वाली पीआईएल पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने दो हफ्ते बाद अगली सुनवाई नियत की है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति डॉ. सतीश चंद्रा की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश एक पीआईएल पर दिया। इसमें, सूबे के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश देने का आग्रह किया गया है। याची के वकील का आरोप था कि राजधानी समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं के साथ सुविधाएं खस्ताहाल हैं। जांच मशीनें कम हैं या फिर खराब हैं, वेंटीलेटर की कमी के साथ-साथ आम लोगों के लिए दवाओं की कमी भी है। कई अस्पतालों के भवन जर्जर हैं। याची ने इन सभी अव्यवस्थाओं को सुधारने की गुहार लगाई थी।
उधर, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने याची के आरोपों को नकारते हुए याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने याचिका की बावत निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिए जाने का आग्रह कोर्ट से किया। इस पर अदालत ने समय देते हुए दो हफ्ते बाद मामले की अगली सुनवाई नियत की है।