लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा दिए जाने वाले अनुदान का यूटीलाइजेशन भेजने में असफल साबित हुआ है। 11वें प्लान में मर्ज्ड स्कीम के तहत मिले पांच करोड़ के अनुदान का हिसाब आयोग को अभी तक नहीं भेजा जा सका है। जबकि इसके लिए आयोग ने तीन बार तिथि बढ़ाई थी और 30 सितंबर की आखिरी तिथि भी बीत गई। बीबीएयू ने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत यूजीसी से 12 करोड़ रुपये मांगे थे, जिस पर आयोग ने विश्वविद्यालय को साढे़ पांच करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया था। इसमें डे केयर सेंटर, पब्लिकेशन ग्रांट, खेल सुविधाओं में सुधार, महिला छात्रावास, इंटरनल क्वालिटी असेसमेंट सेल, निशक्तजनों की सुविधाओं के विकास और कॅरिअर काउंसलिंग सेल समेत कुल 17 कार्यों का मद शामिल था। इन सभी कार्यों में किए गए खर्च का हिसाब भेजने के लिए आयोग ने पहले 31 मार्च की तिथि तय की थी, जिसे बाद में बढ़ा कर 15 मई कर दी गई। इसके बाद भी विश्वविद्यालय ने अनुदान का यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं भेजा। इस दशा में यूजीसी ने इसे भेजने के लिए 30 सितंबर तक के लिए फिर से डेट बढ़ा दी। 30 सितंबर की आयोग की डेडलाइन बीतने के बाद भी बीबीएयू प्रशासन ने आयोग को खर्चे का हिसाब नहीं भेजा। विवि की इस लेटलतीफी से जहां उसकी साख में गिरावट आ रही है। वहीं, यूटीलाइजेशन न देने की दशा में इस मद में आयोग को मिलने वाले अनुदान में कटौती भी हो सकती है। हिसाब न देने के कारण ही आयोग ने 2012-13 के लिए विवि को मर्ज्ड स्कीम में कोई अनुदान स्वीकृत नहीं किया है।