हरदोई। अभिशाप बनती शुगर की बीमारी अब हार्ट अटैक तक की स्थिति को उत्पन्न करने लगी है। चिकित्सकों ने बताया कि शुगर रोगियों में रिएक्टिव प्रोटीन के बढ़ते स्तर से यह स्थितियां उत्पन्न हो रहीं हैं। रविवार को विश्व मधुमेह दिवस पर जिले के चिकित्सकों ने कहा कि यदि रोगी जागरूक रहें तो ताउम्र बीमारी हावी नहीं हो सकती। लेकिन जरा सी भी लापरवाही पर मधुमेह जानलेवा हो सकती है।
नसों के ब्लाक रहने का रहता खतरा
डॉ. सीपी कटियार का कहना है कि विभिन्न शोधों पर अन्य चिकित्सकों से हुई चर्चाओं के बाद जो बात निकलकर सामने आई है, उनमें शुगर रोगियों में एथिरोस्क्लेरोसिस के भी लक्षण मिलने लगे हैं। जिसमें धमनियों में कोलस्ट्रॉल के थक्के बनने व टूटने से छोटी-छोटी नसों के ब्लाक होने का खतरा रहता है। शोधों के बाद पता चला है कि जिन मरीजों में शुगर की मात्रा ज्यादा रही, उनमें हाई सेंसिटिव सी रिएक्टिव प्रोटीन की मात्रा एवं कोलस्ट्रॉल खतरनाक स्तर तक बढ़े मिले हैं।
दिमाग में थक्का बन सकता
डॉ. अजय सिंह ने बताया कि धमनियों में कोलस्ट्रॉल जमा होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इस रोग में धमनियों के अंदर का स्पेस कम होता जाता है। जिससे दिमाग में थक्का बन सकता है। किसी व्यक्ति में किसी कारण से हाई सेंसिटिव सी रिएक्टिव प्रोटीन बढ़ा है किंतु उसमें शुगर नहीं है तो भविष्य में संभावना ज्यादा रहेगी।
हर छह माह में जांच जरूरी
डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि शुगर के प्रकोप से बचना है तो हर छह माह पर हाई सेंसिटिव सी रिएक्टिव प्रोटीन व कोलस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा चक्कर आने, पेशाब में चीटें लगना, बुखार रहना आदि लक्षणों को देखकर भी अंदाजा लगा सकते हैं कि मधुमेह है। उन्होंने कहा कि यदि रोगी जागरूक है और व्यायाम के साथ आहार ले रहा है तो उसका बचाव हो सकता है।
योगासन, व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें
हरदोई। दुनिया भर में दस में से एक वयस्क को मधुमेह की शिकायत है। इसमें से अधिकांश को टाइप-टू डायबिटीज है। बीस करोड़ लोगों को पता ही नहीं कि वे मधुमेह ग्रस्त हैं। शहीद उद्यान स्थित कायाकल्प केंद्र में विश्व मधुमेह दिवस पर आयोजित गोष्ठी में नेचुरोपैथ डॉ. राजेश मिश्रा ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि मधुमेह से बचाव के लिए प्राकृतिक जीवन शैली अपनाएं। खान पान सही रखें। पौष्टिक आहार लें। योगासन, व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना होगा। तनाव और अवसाद से बचें। लापरवाही भूलकर भी न करें। इस मौके पर डॉ. श्रुति दिलीरे, दीपाली, अनामिका, उमादेवी, अभिषेक पांडे, मुदित त्रिपाठी, गोविंद गुप्ता आदि मौजूद रहे। (संवाद)