हरदोई। नगर पालिका ने पिछले कई सालों में करोड़ों रुपये नालों के निर्माण एवं इंटरलाकिंग पर खर्च कर दिए।
दावे यह थे कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त होगी, मगर इन दावों का सच जानना हो तो किसी भी मोहल्ले में निकल जाएं, सच्चाई की तस्वीर सामने होगी। साफ-सफाई को लेकर बेपरवाही करने से नाले और नाली मच्छरों का घरौंदा बन चुके हैं।
शहर में फागिंग तो दूर नालों एवं नालियों में दवाओं का छिड़काव तक नहीं हो रहा है, जिसके चलते डेंगू के डंक का तो डर है ही, साथ ही मलेरिया आदि बीमारियों का भय बना हुआ है।
कुछ समय पूर्व शहर में डेंगू का बड़ा प्रकोप रहा था। शहर की पैथोलाजी से लेकर अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के आंकड़े बता रहे कि 20 हजार से अधिक मरीजों की प्लेटलेट्स कम हुई थी। लोगों में गुस्सा रहा।
लोग सोशल मीडिया पर डेंगू को लेकर फागिंग कराने की अपील करते रहे, मगर जिम्मेदारों के कानों तक आवाज नहीं पहुंची। सांडी रोड पर नुमाइश चौराहे से बावन चुंगी तक नाला निर्माण कार्य कराकर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए।
नाला बनाने के दौरान एस्टीमेट के अनुसार निर्माण कार्य न होने एवं क्षतिग्रस्त इंटरलाकिंग की ईंटों एवं मिट्टी को बेचने की शिकायतें हुई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके चलते कोतवाली शहर के पास नाला चोक हो गया और गंदगी के बीच मच्छरों की फौज खड़ी हो गई। सुभाष नगर में बूढे़ तालाब के पास नाला निर्माण कर गली का एक हिस्सा खोद कर बड़ा नाला बना दिया गया।
छोटी सी गली में बड़े नाले से आधा हिस्सा करीब दो फीट ऊंचा कर दिया गया। इस नाले के बनने के बाद से सफाई नहीं हुई, जिससे नाला चोक हो रहा है। कौशलपुरी में डॉ. कुशवाहा के आवास के पीछे वाली गली की नाली पिछले कई सालों से चोक है।
नाली का पानी लोगों के घरों में घुसता है। इस गली की नाली को बनाने के बजाय गली को ऊंचा कर दिया गया, जिससे नाली नीचे रहने से लोगों को काफी दिक्तते हैं।
कई बार शिकायतें की गई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे कई मामले हैं जिनमें पालिका के जिम्मेदारों की बेपरवाही झलक रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत ड्रेनेज सही न होने एवं साफ सफाई न होने से मच्छरों की बढ़ती तादाद है।
इस ओर जानकारी करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे। जहां कहीं फागिंग आदि की आवश्यकता होगी, नियमानुसार कराई जाएगी।
- रविशंकर शुक्ला, पालिका ईओ