कृषि विभाग में स्थापित मृदा परीक्षण लैब आखिरकार नौ महीने के लंबे इंतजार के बाद फिर से शुरू हो गई है। कर्मचारियों का नवीनीकरण नहीं होने से यह लैब बंद पड़ी थी। ऐसे में मिट्टी के नमूनों को जांच के लिए गाजियाबाद लैब भेजना पड़ता था।
समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से किसान बिना मृदा का स्वास्थ्य जाने फसल की बुवाई करते थे। अब इस समस्या से राहत मिल जाएगी। जिले की मृदा का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है, इसकी पुष्टि मृदा परीक्षण लैब की जांच रिपोर्ट में भी हो चुका है।
शासन ने यहां के किसानों को मिट्टी की जांच के बाद आवश्यक उर्वरकों के प्रयोग से फसल बुवाई की हिदायत दी थी। बीते नौ महीने से कृषि विभाग में स्थापित लैब धूल फांक रही थी। परीक्षण का कार्य करने वाले कर्मचारियों का कॉन्ट्रेक्ट नौ महीने पहले खत्म हो गया था।
कर्मचारी तभी से नवीनीकरण के लिए जेडीए कार्यालय के चक्कर लगा रहा थे, लेकिन जेडीए की मनमानी के चलते उनका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा था। अब दूसरे जेडीए के चार्ज लेने के बाद इन कर्मचारियों का नवीनीकरण हो सका है।
लैब प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि लैब में मृदा विश्लेषक, तकनीकी सहायक, प्रयोगशाला परिचक के पदों का नवीनीकरण हो गया है। अब जल्द ही किसानों को उनकी मृदा का स्वास्थ्य बता दिया जाएगा।
नवीनीकरण में लेट लतीफी से जिले के करीब 13 हजार मृदा नमूनों की जांच काफी देरी से हो सकी है। अनेक किसानों को तो अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिल सके हैं। अब दोबारा से जिले के लैब में परीक्षण का कार्य शुरू होने से जल्द ही किसानों को उनकी मृदा की जांच रिपोर्ट मिल सकेगी।